कैग का कर देनदारी के आकलन के लिए आयकर, जीएसटी विभागों में बेहतर तालमेल का सुझाव
कैग का कर देनदारी के आकलन के लिए आयकर, जीएसटी विभागों में बेहतर तालमेल का सुझाव
नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने राजस्व विभाग से कार्य अनुबंध और निर्माण सेवाएं देने वाली कंपनियों की जीएसटी देनदारी का सही आकलन करने के लिए आयकर और जीएसटी विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने को कहा है।
कैग ने मार्च, 2024 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए माल एवं सेवा कर (जीएसटी) पर अपनी अनुपालन ऑडिट रिपोर्ट में कहा कि करदाताओं की आयकर कार्यवाही से जुड़ी सूचनाओं का इस्तेमाल ऐसी अघोषित आपूर्ति पर संबंधित जीएसटी देनदारी का पता लगाने के लिए किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘राजस्व विभाग को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना चाहिए। साथ ही, आयकर अधिकारियों के पास उपलब्ध अघोषित आय संबंधी सूचनाओं का उपयोग निर्माण और कार्य अनुबंध सेवाएं देने वाले करदाताओं की संबंधित जीएसटी देनदारी तय करने के लिए किया जाना चाहिए।’’
कैग ने 735 करदाताओं के नमूने की जांच में 123 मामलों में अनुपालन संबंधी कमियां पाईं। इन मामलों में कुल 190.98 करोड़ रुपये के राजस्व पर प्रभाव पड़ा।
इन कमियों में सड़क, पुल, रेलवे और मिट्टी कार्य से जुड़े कार्य अनुबंध पर गलत तरीके से रियायती कर दर या छूट का लाभ लेना, सरकारी प्राधिकरणों को दी गई कार्य अनुबंध सेवाओं पर कम कर जमा करना, जारी या पूरी हो चुकी परियोजनाओं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का अनियमित लाभ लेना, आयकर विभाग द्वारा पकड़ी गई अघोषित आय यानी रिकॉर्ड से बाहर प्राप्त राशि पर जीएसटी जमा नहीं करना और मेट्रो परियोजनाओं में कम कर भुगतान जैसी अनियमितताएं शामिल थीं।
कैग ने राजस्व विभाग से कहा कि वह जांच या आंतरिक ऑडिट के दायरे में अधिक मामलों को शामिल करने के लिए व्यवस्था बनाए। खासकर उन मामलों की समीक्षा की जाए, जहां सड़क, पुल और रेलवे परियोजनाओं का काम करने वाले उप-ठेकेदार या उप-उप-ठेकेदार कार्य अनुबंध सेवाओं पर रियायत का लाभ ले रहे हैं, ताकि करदाताओं द्वारा सही कर भुगतान सुनिश्चित हो सके।
रिपोर्ट में कहा गया कि विभाग को रियायतों के दावों को नियंत्रित करने के लिए उचित सत्यापन व्यवस्था लागू करने की संभावना भी तलाशनी चाहिए।
कैग ने यह भी सुझाव दिया कि राजस्व विभाग ऐसी व्यवस्था बनाए, जिसके तहत उन मामलों की जांच या आंतरिक ऑडिट किया जाए जहां कार्य अनुबंध या निर्माण सेवाएं देने वाले करदाता सरकारों से सेवाएं प्राप्त करते हैं या अपंजीकृत आपूर्तिकर्ताओं से वस्तुएं और सेवाएं लेते हैं। इससे ऐसे मामलों में ‘रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म’ के तहत सही जीएसटी भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
‘रिवर्स चार्ज’ व्यवस्था के तहत कर भुगतान की जिम्मेदारी सेवा प्राप्त करने वाले पर होती है
जीएसटी कानून के तहत कार्य अनुबंध का अर्थ किसी अचल संपत्ति से जुड़े कार्य से है। पुराने वैट और सेवा कर नियमों के विपरीत, जीएसटी व्यवस्था में चल संपत्ति से जुड़े कार्यों को कार्य अनुबंध में शामिल नहीं किया जाता।
किसी सेवा को जीएसटी के तहत कार्य अनुबंध मानने के लिए संपत्ति का हस्तांतरण एक महत्वपूर्ण शर्त है।
भाषा रमण अजय
अजय

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