स्वत: संज्ञान लेने से बच रहा सीसीआई, किसी पक्ष के आगे आने के बाद हो रही कार्रवाई: समिति

स्वत: संज्ञान लेने से बच रहा सीसीआई, किसी पक्ष के आगे आने के बाद हो रही कार्रवाई: समिति

स्वत: संज्ञान लेने से बच रहा सीसीआई, किसी पक्ष के आगे आने के बाद हो रही कार्रवाई: समिति
Modified Date: July 26, 2026 / 03:56 pm IST
Published Date: July 26, 2026 3:56 pm IST

नयी दिल्ली, 26 जुलाई (भाषा) भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) स्वत: संज्ञान वाले मामलों को उठाने से परहेज कर रहा है और वह किसी भी मामले पर किसी पक्ष के आगे आने के बाद ही कार्रवाई कर रहा है। आयोग ने एक संसदीय समिति को यह जानकारी दी है।

नियामक के पास सभी क्षेत्र में अनुचित व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।

राज्यसभा की अधीनस्थ विधान समिति ने सीसीआई के अलग-अलग नियमों और निर्देशों की जांच करते हुए स्वतः संज्ञान मामलों में आई कमी के मुद्दे को उठाया।

समिति की 19 मई को हुई बैठक में सीसीआई की चेयरपर्सन रवनीत कौर ने बताया कि शुरुआती वर्षों में ऐसे मामलों की संख्या अधिक थी, क्योंकि प्रतिस्पर्धा कानून को लेकर जागरूकता सीमित थी।

नियामक ने कहा, “आयोग को लगा कि वह एक पक्ष के खिलाफ मामला भी बना रहा है और उसी पर निर्णय भी दे रहा है, जिससे हितों के टकराव की स्थिति बनती है।’’

समिति ने कहा, ‘‘इसलिए अब ऐसे मामलों को तभी लिया जाता है जब कोई अन्य पक्ष आगे आने को तैयार न हो। साथ ही, जिन क्षेत्रों में क्षेत्रीय नियामक मौजूद हैं, वहां आयोग संयम बरतता है।”

समिति की रिपोर्ट इस सप्ताह संसद में पेश की गई है।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘अब तक प्राप्त 1,375 प्रतिस्पर्धा-रोधी मामलों में से 1,237 का निपटारा किया जा चुका है।’’

इस बीच, समिति के चेयरमैन मिलिंद मुरली देवड़ा ने एंड्रॉयड स्मार्ट टीवी मामले में केवल 20.24 करोड़ रुपये के निपटान पर सवाल उठाया, जबकि यूरोपीय संघ ने इसी तरह के मामले में चार अरब डॉलर का जुर्माना लगाया था।

इस पर सीसीआई चेयरपर्सन रवनीत कौर ने स्पष्ट किया कि स्मार्ट टीवी मामले में निपटान राशि भारत में संबंधित बाजार से कंपनी के कारोबार के आधार पर तय की गई थी।

गूगल ने एंड्रॉयड स्मार्ट टीवी बाजार में कथित अनुचित कारोबारी व्यवहार से जुड़े लगभग चार साल पुराने मामले में सीसीआई के साथ अप्रैल, 2025 में समझौता किया था और विक्रेताओं के साथ अपने समझौतों में बदलाव करने पर सहमति जताई थी। इस मामले में 20.24 करोड़ रुपये का निपटान हुआ था।

भाषा यासिर अजय

अजय


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