अधिक मूल्य के लेनदेन पर शुल्क से यूपीआई के विस्तार को मिलेगा प्रोत्साहन: विशेषज्ञ
अधिक मूल्य के लेनदेन पर शुल्क से यूपीआई के विस्तार को मिलेगा प्रोत्साहन: विशेषज्ञ
नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) यानी शुल्क लगाना डिजिटल भुगतान व्यवस्था को टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे ग्रामीण और छोटे शहरों में यूपीआई के विस्तार को बढ़ावा देने के लिए जरूरी निवेश और प्रोत्साहन मिल सकेगा। विशेषज्ञों ने बुधवार को यह बात कही।
उनका कहना है कि छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक अलग कोष भी बनाया जाएगा। इसमें एमडीआर से होने वाले कुल संग्रह का पांच प्रतिशत योगदान दिया जाएगा। इससे छोटे कारोबारियों के बीच यूपीआई की स्वीकार्यता और उपयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पेय-यू के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अनिर्बन मुखर्जी ने कहा, ‘‘यूपीआई की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि विभिन्न शहरों और कस्बों में लाखों व्यापारी तथा करोड़ों ग्राहक डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं। एमडीआर की वापसी इस व्यवस्था को टिकाऊ आधार देने और यूपीआई के आगे विस्तार में मदद करेगी।’’
कैशफ्री के सह-संस्थापक रीजू दत्ता ने कहा कि तय दर पर एमडीआर से इस व्यवस्था के लिए सीधे पैसा जुटाने और छोटे शहरों में धोखाधड़ी रोकने तथा भुगतान ढांचा मजबूत करने जैसे क्षेत्रों में निवेश करने का रास्ता खुलेगा।
उन्होंने कहा कि इससे नई कंपनियों को बाजार में आने और अलग-अलग जरूरतों के लिए नए समाधान विकसित करने का प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे यूपीआई का उपयोग और बढ़ेगा।
रिसर्जेंट इंडिया के प्रबंध निदेशक ज्योति प्रकाश गाडिया ने कहा कि यह फैसला दिखाता है कि भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था परिपक्व हो रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘यूपीआई व्यवस्था के विस्तार के साथ सस्ती और टिकाऊ डिजिटल भुगतान सेवाओं के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। एक मजबूत और टिकाऊ वित्तीय भुगतान व्यवस्था भारत की भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था की वृद्धि के अनुरूप नई सेवाओं और उनकी गुणवत्ता को बढ़ावा देने में सक्षम होगी।’’
स्पाइस मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी दिलीप मोदी ने कहा कि व्यक्ति से व्यापारियों को किए जाने वाले उच्च मूल्य के लेनदेन पर सीमित दर से एमडीआर लागू करना इस पूरी व्यवस्था के लिए टिकाऊ आर्थिक आधार तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा, ‘‘संतुलित एमडीआर व्यवस्था से बैंकों, भुगतान कंपनियों और अंतिम स्तर के भुगतान नेटवर्क के लिए टिकाऊ आर्थिक आधार तैयार करने में मदद मिलेगी। ये संस्थाएं ऐसे लेनदेन के लिए जरूरी ढांचे और सेवाओं में निवेश करती हैं। साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि शुल्क डिजिटल भुगतान के उपयोग में बाधा न बने।’’
भाषा रमण अजय
अजय

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