शासक को फूल से शहद लेने वाली मधुमक्खी की तरह कर जुटाना चाहिए: नीति उपाध्यक्ष लाहिड़ी

शासक को फूल से शहद लेने वाली मधुमक्खी की तरह कर जुटाना चाहिए: नीति उपाध्यक्ष लाहिड़ी

शासक को फूल से शहद लेने वाली मधुमक्खी की तरह कर जुटाना चाहिए: नीति उपाध्यक्ष लाहिड़ी
Modified Date: September 16, 2026 / 07:26 pm IST
Published Date: September 16, 2026 7:26 pm IST

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क (एमडीआर) लगाने के केंद्र के फैसले का बचाव करते हुए बुधवार को कहा कि सरकार को बिना सब्सिडी दिए कारोबार क्षेत्र को टिकाऊ बनाए रखने के तरीके तलाशने होंगे।

प्राचीन भारतीय दार्शनिक एवं आचार्य चाणक्य का उल्लेख करते हुए लाहिड़ी ने कहा था कि शासक को नागरिकों से उसी तरह कर लेना चाहिए, जैसे मधुमक्खी फूल से धीरे-धीरे शहद लेती है और उसे नुकसान भी नहीं पहुंचाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए आपको बिना सब्सिडी दिए बिना कारोबार को टिकाऊ बनाए रखने के तरीके तलाशने होंगे।’’

लाहिड़ी ने एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘100 रुपये के लेनदेन पर आप 40 पैसे का भुगतान करते हैं। वह भी बड़े लेनदेन पर… क्या इससे आपका कारोबार खत्म हो जाएगा? नहीं, लेकिन आपको कारोबार आत्मनिर्भर तरीके से करना होगा।’’

करीब छह साल तक पूरी तरह नि:शुल्क रहे यूपीआई भुगतान की व्यवस्था को बदलने का सरकार ने मंगलवार को फैसला लिया। नए नियमों के तहत 15 अक्टूबर से व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की गई। यह शुल्क व्यापारियों को देना होगा। हालांकि, रोजमर्रा के व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) लेनदेन और छोटे भुगतान को इस शुल्क से बाहर रखा गया है।

लाहिड़ी ने कहा, ‘‘आप इसके आदी हो जाएंगे। उदाहरण के लिए, जब आप बैंक से चेक बुक लेते हैं तो उसके लिए थोड़ी राशि का भुगतान करते हैं। क्या इससे आपको परेशानी होती है? यह कारोबार का हिस्सा है।’’

‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लगाने के फैसले का व्यापारियों, दुकानदारों और कुछ राजनीतिक दलों समेत कई वर्गों ने विरोध किया है। कुछ दलों ने इसे ‘मोदी टैक्स’ भी कहा है।

सरकारी सूत्रों ने बुधवार को कहा कि एमडीआर लगाने का फैसला यूपीआई परिवेश के व्यापक हित में और इसकी सुरक्षा एवं मजबूती बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।

भाषा यासिर अजय

अजय


लेखक के बारे में