यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने के फैसले के पीछे कोई विदेशी प्रभाव नहींः वित्त मंत्रालय

यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने के फैसले के पीछे कोई विदेशी प्रभाव नहींः वित्त मंत्रालय

यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने के फैसले के पीछे कोई विदेशी प्रभाव नहींः वित्त मंत्रालय
Modified Date: September 16, 2026 / 07:06 pm IST
Published Date: September 16, 2026 7:06 pm IST

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) वित्त मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लगाने के फैसले के पीछे कोई विदेशी प्रभाव नहीं है।

सरकार का यह स्पष्टीकरण कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों के उन आरोपों के बाद आया है कि सरकार ने यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने का फैसला अमेरिकी दबाव में आकर किया है।

मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘‘कुछ दावों में कहा जा रहा है कि यह बदलाव विदेशी प्रभाव के कारण किया गया है। यह गलत है। भारत की यूपीआई नीति से जुड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं और इनका उद्देश्य आत्मनिर्भर, समावेशी तथा किफायती डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तैयार करना है।”

मंत्रालय ने कहा कि उच्च मूल्य वाले व्यापारी लेनदेन पर लगा छोटा शुल्क यूपीआई व्यवस्था को वित्तीय रूप से टिकाऊ, सुरक्षित और नवोन्मेषी बनाए रखने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा तथा छोटे कारोबारियों को समर्थन देने में मदद करेगा।

इसके साथ ही, मंत्रालय ने कहा कि एमडीआर न तो कर है और न ही सरकार या भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क है। यह यूपीआई प्रणाली के संचालन और इसके निरंतर विस्तार में सहयोग के लिए बैंकों और भुगतान ऐप प्रदाताओं समेत भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच वितरित किया जाता है।

यूपीआई प्रणाली का संचालन करने वाली एनपीसीआई ने कहा कि इससे मिलने वाले राजस्व से बुनियादी ढांचे की मजबूती, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम, नवाचार और ग्राहक सेवा में निवेश को समर्थन मिलेगा।

इससे पहले दिन में सरकारी सूत्रों ने कहा था कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने के फैसले पर पुनर्विचार का कोई सवाल नहीं है।

सरकार ने मंगलवार को ऐलान किया कि 15 अक्टूबर से व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगेगा। हालांकि, दो व्यक्तियों के बीच भुगतान और छोटे भुगतान को इससे बाहर रखा गया है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

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