चीन ने अमेरिकी कर्ज को 17 साल के निचले स्तर तक कम किया, मुद्रा भंडार को सोने में बदला

चीन ने अमेरिकी कर्ज को 17 साल के निचले स्तर तक कम किया, मुद्रा भंडार को सोने में बदला

चीन ने अमेरिकी कर्ज को 17 साल के निचले स्तर तक कम किया, मुद्रा भंडार को सोने में बदला
Modified Date: January 17, 2026 / 05:47 pm IST
Published Date: January 17, 2026 5:47 pm IST

(के जे एम वर्मा)

बीजिंग, 17 जनवरी (भाषा) वाशिंगटन के साथ अस्थिर संबंधों के बीच चीन ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने और विदेशी इक्विटी निवेशों की हिस्सेदारी को बढ़ाया है, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग्स को 17 साल के निचले स्तर तक घटा दिया है।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बृहस्पतिवार को जारी आंकड़ों में बताया कि चीन की अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग पिछले साल नवंबर में घटकर 682.6 अरब डॉलर रह गई, जो अक्टूबर में 688.7 अरब डॉलर थी। यह 2008 के बाद का सबसे निचला स्तर है।

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आंकड़ों के अनुसार चीन ने अपनी अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग में कटौती करने का कदम ऐसे वक्त में उठाया, जब अमेरिका पर कर्ज रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इस दौरान जापान और ब्रिटेन ने अपनी होल्डिंग बढ़ाई। जापान की होल्डिंग 2.6 अरब डॉलर बढ़कर 1200 अरब डॉलर हो गई, जबकि ब्रिटेन की होल्डिंग 10.6 अरब डॉलर बढ़कर 888.5 अरब डॉलर हो गई।

आधिकारिक मीडिया रिपोर्टों के अनुसार चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार है, जो दिसंबर 2025 के अंत में कुल 3,357 अरब डॉलर था। पर्यवेक्षकों का कहना है कि चीन ने अमेरिकी होल्डिंग में कमी करके सोने, गैर-अमेरिकी मुद्राओं और विदेशी इक्विटी निवेश जैसी अन्य संपत्तियों में निवेश बढ़ाया है।

शंघाई यूनिवर्सिटी ऑफ फाइनेंस एंड इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर शी जुन्यांग ने ग्लोबल टाइम्स को बताया, ”चीन की अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग में कमी हाल के वर्षों में विदेशी संपत्तियों की होल्डिंग्स के बढ़ते अनुकूलन और विविधीकरण का नतीजा है। इससे पोर्टफोलियो की समग्र सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।”

फूडान विश्वविद्यालय में विज्ञान-प्रौद्योगिकी नवाचार प्रबंधन अनुसंधान केंद्र के मुख्य अर्थशास्त्री शाओ यू ने कहा कि अमेरिकी ऋण के बढ़ते जोखिम के बीच बीजिंग अपने भंडार को कम करना जारी रखेगा। उन्होंने कहा, ”कर्ज का भारी संचय एक पोंजी स्कीम जैसा दिखता है, जहां पुराने कर्ज को बदलने के लिए बड़ी मात्रा में नए कर्ज लिए जाते हैं। चीन अब इस खेल को और नहीं खेलना चाहता।”

भाषा पाण्डेय

पाण्डेय


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