नयी दिल्ली, 18 जनवरी (भाषा) उद्योग मंडल सीआईआई का कारोबारी विश्वास सूचकांक वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में बढ़कर 66.5 के स्तर पर पहुंच गया है। रविवार को जारी आंकड़ों के अनुसार मांग, मुनाफे और निवेश की स्थिति में सुधार के चलते यह पांच तिमाही के उच्चतम स्तर पर है।
सर्वेक्षण के मुताबिक घरेलू मांग सबसे बड़ा कारक बनी हुई है। दो-तिहाई कंपनियों ने दूसरी तिमाही में बेहतर मांग दर्ज की, जबकि 72 प्रतिशत को तीसरी तिमाही में जीएसटी कटौती और त्योहारी खपत के कारण और अधिक वृद्धि की उम्मीद है।
सीआईआई- कारोबारी विश्वास सूचकांक (बीसीआई) देश के विभिन्न क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु, मध्यम और बड़े उद्यमों सहित सभी औद्योगिक क्षेत्रों के नमूना सर्वेक्षण पर आधारित है।
यह सर्वेक्षण दिसंबर 2025 के पहले से तीसरे सप्ताह के दौरान किया गया था, जिसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों से जुड़ी 175 से अधिक कंपनियां शामिल थीं।
इसके अलावा, निवेश और नियुक्तियों को लेकर कंपनियों का रुख सकारात्मक बना हुआ है।
सर्वेक्षण में शामिल 69 प्रतिशत प्रतिभागियों को उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) के अंत तक रेपो दर में कटौती करेगा।
सीआईआई ने भरोसा जताया कि भारत की वृद्धि दर को बनाए रखने के लिए बजट में सुधारों की गति जारी रहेगी।
सर्वेक्षण से यह भी पता चला कि 22 सितंबर से प्रभावी जीएसटी कटौती से बिक्री बढ़ी है। करीब 56.3 प्रतिशत प्रतिभागियों को आने वाली तिमाहियों में अपनी बिक्री में पांच से 20 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है।
उद्योग मंडल ने कहा कि साहसिक सुधारों के कारण भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, जिसने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ”कारोबारी विश्वास में निरंतर वृद्धि यह दर्शाती है कि उद्योग बाहरी चुनौतियों से निपटने में सक्षम है। इसे मजबूत घरेलू मांग और सुधार एजेंडे से समर्थन मिल रहा है।”
उन्होंने कहा कि उद्योग जगत को आने वाले महीनों में वृद्धि की गति और मजबूत होने की उम्मीद है।
वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट के लिए सीआईआई ने पूंजीगत व्यय को बनाए रखने का सुझाव दिया है, जिसमें 150 लाख करोड़ रुपये की नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (एनआईपी) 2.0 शुरू की जा सकती है।
उद्योग मंडल ने कहा कि अवसंरचना वितरण में तेजी लाने और निजी निवेश बढ़ाने के लिए राजस्व पैदा करने वाली परियोजनाओं और विवाद समाधान तंत्र पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
सीआईआई ने अनुपालन बोझ कम करने और कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये के ‘डिजिटलीकरण कोष’ का सुझाव भी दिया है।
भाषा सुमित पाण्डेय
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