मुंबई, चार मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के चलते बुधवार को भारत सरकार का बॉन्ड प्रतिफल बढ़कर लगभग तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
बाजार आंकड़ों के अनुसार, मानक 10 वर्षीय सरकारी प्रतिभूति पर प्रतिफल बढ़कर 6.7112 प्रतिशत हो गया, जो 20 फरवरी के बाद का इसका उच्चतम स्तर है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल, विशेषकर ब्रेंट क्रूड के 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से घरेलू ऋण बाजार में बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे प्रतिफल में बढ़ोतरी हुई। तेल की बढ़ती कीमतों को मुद्रास्फीति बढ़ाने वाला कारक माना जाता है, जिससे भारत के चालू खाता घाटे के बढ़ने की भी आशंका रहती है। इन्हीं चिंताओं ने ऋण बाजार की धारणा को कमजोर किया है।
रॉकफोर्ट फिनकैप एलएलपी के संस्थापक वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा, ‘ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें ऊपर गई हैं और रुपया कमजोर हुआ है। इसके परिणामस्वरूप भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल बढ़कर 6.71 प्रतिशत के करीब पहुंच गया है।’
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि शेयर और मुद्रा बाजार की तीव्र प्रतिक्रिया की तुलना में बॉन्ड बाजार में हलचल अपेक्षाकृत कम रही है। इसका कारण कुछ घरेलू तकनीकी कारक हैं जिन्होंने प्रतिफल में बहुत अधिक उछाल को रोक रखा है।
भाषा सुमित पाण्डेय
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