नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने मंगलवार को कहा कि उसने झारखंड के सिंदरी में कोयला गैसीकरण से बनने वाली सिनगैस (सिंथेटिक गैस) के जरिये यूरिया उत्पादन की व्यवहार्यता का अध्ययन करने के लिए हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) के साथ एक समझौता किया है।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने और उर्वरक उत्पादन के लिए आयातित प्राकृतिक गैस तथा अन्य कच्चे माल पर निर्भरता घटाने पर जोर दे रही है।
महारत्न कंपनी ने शेयर बाजार को बताया, ‘‘कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) ने झारखंड के सिंदरी में कोयला गैसीकरण आधारित यूरिया उत्पादन संयंत्र के विकास की संभावनाएं तलाशने के लिए 29 सितंबर, 2026 को एक गैर-बाध्यकारी सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।’’
सूचना के मुताबिक, इस समझौते के तहत शुरुआती ध्यान परियोजना की तकनीकी, वाणिज्यिक और कार्यान्वयन संबंधी तौर-तरीकों की पड़ताल करने पर होगा। इस संबंध में एक प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
कोयला को सीधे जलाने की तुलना में कोयला गैसीकरण को अपेक्षाकृत स्वच्छ विकल्प माना जाता है। गैसीकरण प्रक्रिया से कोयले के रासायनिक गुणों का उपयोग संभव हो पाता है। कोयला गैसीकरण से उत्पादित सिनगैस का उपयोग कृत्रिम प्राकृतिक गैस (एसएनजी), ऊर्जा ईंधन (मेथनॉल और एथनॉल), उर्वरकों के लिए अमोनिया और पेट्रोरसायन के उत्पादन में किया जा सकता है।
राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन के तहत वर्ष 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। भारत के घरेलू कोयला उत्पादन में कोल इंडिया लिमिटेड की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक है।
भाषा पाण्डेय अजय
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