कोयला से गैस बनाने की परियोजना भारत की अमोनियम नाइट्रेट की 35 प्रतिशत जरूरतें पूरी करेगी: उद्योग

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कोयला से गैस बनाने की परियोजना भारत की अमोनियम नाइट्रेट की 35 प्रतिशत जरूरतें पूरी करेगी: उद्योग

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  • Publish Date - June 20, 2026 / 05:52 PM IST,
    Updated On - June 20, 2026 / 05:52 PM IST

नयी दिल्ली, 20 जून (भाषा) ओडिशा में 25,016 करोड़ रुपये की लागत वाली कोयले से गैस बनाने की परियोजना से 2030 तक देश की अनुमानित अमोनियम नाइट्रेट की मांग का लगभग 35 प्रतिशत पूरा होने की उम्मीद है। उद्योग विशेषज्ञों ने शनिवार को यह कहा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त रूप से ओडिशा के झारसुगुडा जिले के लखनपुर में भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लि. (बीसीजीसीएल) परियोजना की आधारशिला रखी।

विशेषज्ञों ने कहा कि एक बार चालू होने के बाद, यह संयंत्र सालाना लगभग 6.6 लाख टन आयात कम करेगा और हर साल 36 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत करेगा।

उद्योग ने कहा कि परियोजना की परिचालन अवधि के दौरान आयात में कमी से कुल बचत नौ अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो सकती है।

परियोजना का विकास बंगाल कोल एंड गैसीफिकेशन कंपनी लि. कर रही है। यह कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) और कोल इंडिया लि. की एक संयुक्त उद्यम इकाई है। इस परियोजना में स्थानीय रूप से उपलब्ध कोयले को सिंथेसिस गैस में बदलने के लिए स्वदेशी कोल गैसीफिकेशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसे बाद में अमोनियम नाइट्रेट में प्रसंस्करण किया जाएगा, जो उर्वरक और औद्योगिक विस्फोटकों के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है।

न्यू एरा क्लीनटेक सॉल्यूशन प्राइवेट लि. के संस्थापक और प्रबंध निदेशक बालासाहेब दराडे ने कहा, ‘‘आज बीसीजीसीएल कोयले से अमोनियम नाइट्रेट बनाने की परियोजना की आधारशिला रखना भारत के औद्योगिक विकास में एक निर्णायक क्षण है। यह केवल अमोनियम नाइट्रेट कारखाने का उद्घाटन नहीं है बल्कि यह एक कोयले से रसायन तैयार करने के परिवेश का उदय है। यह बताता है कि कैसे भारत के प्रचुर कोयला संसाधनों को रणनीतिक औद्योगिक उत्पादों में बदला जा सकता है।’’

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री इस बात को पहचानने के लिए श्रेय के पात्र हैं कि 21वीं सदी में वास्तविक ऊर्जा सुरक्षा ईंधन से आगे बढ़कर रणनीतिक अणुओं (मॉलिक्यूल्स) तक फैली हुई है। उनकी सोच ने राष्ट्रीय परिचर्चा को ‘खदानों और मेगावाट’ से बदलकर ‘अणुओं और विनिर्माण’ तक पहुंचा दिया है।

राष्ट्रीय कोयला गैसीफिकेशन मिशन और 2030 तक 10 करोड़ टन कोल गैसीफिकेशन के लक्ष्य ने एक नई औद्योगिक क्रांति की नींव रखी है।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर रिफाइनरी क्रांति ने कच्चे तेल से मूल्य सृजित किया, तो कोल गैसीफिकेशन भी भारत के विशाल कोयला भंडार से अमोनिया, अमोनियम नाइट्रेट, मेथनॉल, हाइड्रोजन, सिंथेटिक ईंधन आदि के जरिये वैसी ही मूल्य सृजित कर सकता है।’’

दराडे ने कहा, ‘‘भारत का कोयला अब सिर्फ एक ईंधन नहीं रहा बल्कि यह एक रणनीतिक औद्योगिक संसाधन बन रहा है जो देश को ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ की ओर ले जाने में सक्षम है।’’

गैसीफिकेशन टेक्नोलॉजीज एंड रिसर्च काउंसिल (जीटीआरसी) के चेयरमैन और पूर्व कोयला सचिव अमृत लाल मीणा ने कहा कि ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताएं ऊर्जा सुरक्षा, उर्वरक और रसायन बाजार पर असर डाल रही हैं, कोयला से गैस बनाने की परियोजना भारत को मजबूती की राह दिखाती है।’’

भाषा रमण योगेश

रमण