लातूर, 20 जून (भाषा) कांग्रेस सांसद डॉ. शिवाजी कालगे ने लोकसभा सदस्य बनने के बाद चिकित्सीय पेशे को कम समय दे पाने के कारण खुद को आर्थिक नुकसान होने संबंधी अपने पूर्व के बयान पर सफाई देते हुए कहा है उनकी बातों को ‘‘संदर्भ से हटकर और तोड़-मरोड़कर पेश किया गया’’।
लातूर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले कालगे ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कुछ लोगों ने जानबूझकर उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया और ऐसा दिखाने की कोशिश की कि मानो उन्हें सार्वजनिक जीवन में आने का पछतावा हो या वह इसे नुकसान मानते हों।
इस हफ़्ते की शुरुआत में कालगे ने कहा था, ‘‘वित्त वर्ष 2023-24 में मैंने लगभग 36 लाख रुपये आयकर के तौर पर दिए थे। 2024-25 में मेरा कर भुगतान लगभग 8.75 लाख रहा क्योंकि मेरी आय काफ़ी कम हो गई। मैं अपने मरीज़ों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहा हूँ और न ही अपना अस्पताल पूर्णकालिक रूप चला पा रहा हूँ।’’
सांसद ने कहा था, ‘‘अगर कोई मेरी आर्थिक स्थिति के बारे में पूछे, तो मैं कहूंगा कि सांसद बनने के बाद मुझे नुकसान हुआ है।’’
इस बयान पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए, कालगे ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि न होने के बावजूद, कांग्रेस ने उन्हें लातूर से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका दिया तथा जनता ने उन्हें बड़ी जीत प्रदान की।
उन्होंने कहा कि पार्टी और मतदाताओं का उन पर जताया गया भरोसा उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है और यह जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को प्रेरित करता रहता है।
साक्षात्कार के दौरान पत्रकारों ने उनसे सार्वजनिक जीवन में आने के बाद उनके चिकित्सीय पेशे के बारे में पूछा था। जवाब में उन्होंने कहा था कि उनके चिकित्सीय पेशे पर असर पड़ा है, क्योंकि अब उनका अधिकांश समय सामाजिक और राजनीतिक ज़िम्मेदारियों में बीतता है।
कालगे ने कहा, ‘‘लेकिन कुछ लोगों ने जानबूझकर इस बयान को गलत तरीके से पेश किया और ऐसा दिखाया मानो मुझे सार्वजनिक जीवन में आने का पछतावा है या मैं इसे नुकसान मानता हूँ। ऐसी व्याख्याएँ उस बात से बहुत अलग हैं जो मैंने असल में कही थी।’’
सांसद ने कहा कि लोकसभा में सेवा करने का अवसर अमूल्य है और इसकी तुलना आर्थिक लाभ या किसी अन्य व्यक्तिगत विचार से नहीं की जा सकती।
कालगे ने कहा कि मतदाताओं, पार्टी कार्यकर्ताओं और गठबंधन के नेताओं से उन्हें जो स्नेह एवं समर्थन मिला है, उसे कभी भी पैसों में नहीं मापा जा सकता।
भाषा
नेत्रपाल माधव
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