वाणिज्य मंत्रालय अगले सप्ताह पेश कर सकता है निर्यात प्रोत्साहन मिशन के आठ घटक
वाणिज्य मंत्रालय अगले सप्ताह पेश कर सकता है निर्यात प्रोत्साहन मिशन के आठ घटक
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) वाणिज्य मंत्रालय 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन के आठ घटक अगले सप्ताह पेश कर सकता है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले साल नवंबर में 45,000 करोड़ रुपये से अधिक के संयुक्त परिव्यय वाली दो योजनाओं निर्यात प्रोत्साहन मिशन (25,060 करोड़ रुपये) और ऋण गारंटी योजना (20,000 करोड़ रुपये) को मंजूरी दी थी।
निर्यात प्रोत्साहन मिशन (ईपीएम) दो एकीकृत उप-योजनाओं निर्यात प्रोत्साहन (वित्तीय सहायक) और निर्यात दिशा (गैर-वित्तीय सहायक) के माध्यम से संचालित होता है। यह मिलकर वित्तीय और गैर-वित्तीय सहायता से जुड़े पहलुओं पर काम करते हैं।
सरकार ने दिसंबर 2025 में 4,531 करोड़ रुपये की अंतर्गत बाजार पहुंच सहायता (एमएएस) योजना शुरू की थी।
सरकार ने जनवरी में 7,295 करोड़ रुपये का निर्यात सहायता पैकेज घोषित किया जिसमें 5,181 करोड़ रुपये की ब्याज सहायता योजना और 2,114 करोड़ रुपये का जमानत समर्थन शामिल है ताकि निर्यातकों की ऋण तक पहुंच बेहतर हो सके।
ये सभी उपाय छह वर्षों (2025-31) की अवधि में लागू किए जाएंगे।
अधिकारी ने कहा, ‘‘ अब हम ईपीएम के आठ घटकों को शुरू करने पर काम कर रहे हैं। इसे अंतिम रूप दे दिया गया है। हम अगले सप्ताह इसकी घोषणा करेंगे।’’
उन्होंने कहा कि ये घटक ई-कॉमर्स, ‘वेयरहाउसिंग’ और ‘फैक्टरिंग’ सेवाओं जैसे मुद्दों से जुड़े होंगे।
वैश्विक सीमा-पार ‘फैक्टरिंग’ का अनुमानित आकार 758 अरब अमेरिकी डॉलर है जबकि भारत में यह केवल एक अरब अमेरिकी डॉलर है।
निर्यात प्रोत्साहन ब्याज अनुदान, निर्यात लेनदारी लेखा क्रय (फैक्टरिंग), संपार्श्विक गारंटी, ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट कार्ड और नए बाजारों में विविधीकरण के लिए ऋण वृद्धि सहायता जैसे कई साधनों के माध्यम से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए किफायती व्यापार वित्त तक पहुंच में सुधार पर केंद्रित है।
यह गैर-वित्तीय सक्षमताओं पर केंद्रित है जो बाजार की तैयारी और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाती हैं। इसमें निर्यात गुणवत्ता एवं अनुपालन सहायता, अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडिंग, पैकेजिंग के लिए सहायता एवं व्यापार मेलों में भागीदारी, निर्यात भंडारण व लॉजिस्टिक, अंतर्देशीय परिवहन प्रतिपूर्ति व व्यापार खुफिया तथा क्षमता निर्माण पहलें शामिल हैं।
ईपीएम प्रमुख निर्यात सहायता योजनाओं जैसे कि ब्याज समकरण योजना (आईईएस) तथा बाजार पहुंच पहल (एमएआई) को समेकित करता है और उन्हें समकालीन व्यापार आवश्यकताओं के साथ संयोजित करता है।
भाष्सस निहारिका
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