नयी दिल्ली, 29 मई (भाषा) सरकार ने कंपनियों को अपने ‘कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व’ (सीएसआर) कोष का अधिकतम 10 प्रतिशत हिस्सा सोशल स्टॉक एक्सचेंज (एसएसई) के माध्यम से जारी किए जाने वाले ‘शून्य कूपन-शून्य मूलधन’ साधनों में निवेश करने की अनुमति दे दी है।
कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत लाभ कमाने वाली कंपनियों के लिए अपने पिछले तीन वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम-से-कम दो प्रतिशत सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना अनिवार्य है।
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने शुक्रवार को कंपनी अधिनियम की अनुसूची-7 में ‘सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर शून्य कूपन-शून्य मूलधन साधनों की सदस्यता’ को सीएसआर गतिविधियों में शामिल कर दिया। इस अनुसूची में कंपनियों के लिए निर्दिष्ट सीएसआर गतिविधियों का उल्लेख है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह संशोधन कंपनियों के लिए नियम अनुपालन को आसान बनाएगा और गैर-लाभकारी संगठनों (एनपीओ) को पारदर्शी और विनियमित तरीके से सामाजिक परियोजनाओं के लिए धन जुटाने में मदद करेगा।
इन प्रावधानों के तहत एनपीओ सोशल स्टॉक एक्सचेंज के जरिए ‘शून्य कूपन-शून्य मूलधन’ साधन जारी कर सकेंगे जिनमें न तो ब्याज मिलेगा और न ही मूलधन की वापसी होगी। लेकिन इनके जरिए जुटाई गई राशि सार्वजनिक कल्याण परियोजनाओं में खर्च की जाएगी।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी कंपनी द्वारा ऐसे साधनों में किया गया निवेश उसके कुल सीएसआर खर्च के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है।
सलाहकार फर्म पीडब्ल्यूसी इंडिया के साझेदार (नियामकीय) अंशुल जैन ने कहा कि यह कदम सीएसआर फंडिंग को अधिक पारदर्शी बनाने और सामाजिक क्षेत्रों के लिए पूंजी जुटाने के नए रास्ते खोलने में मदद करेगा।
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