नयी दिल्ली, 29 मई (भाषा) वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से कहा कि वे बदलते वैश्विक हालात और अनिश्चितताओं के बीच अपनी मजबूती बनाए रखें और सभी स्तरों पर सोच-समझकर खर्च करें तथा मितव्ययिता अपनाएं।
वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने सार्वजनिक क्षेत्र के बेंकों के वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए बैंकों को सलाह दी कि वे पात्र उधारकर्ताओं को ईसीएलजीएस 5.0 के तहत सक्रिय और आवश्यकता-आधारित सहायता प्रदान करें, शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करें, परिचालन दक्षता बढ़ाएं और लाभप्रदता तथा दीर्घकालिक वृद्धि बनाए रखने के लिए नए व्यवसाय अवसरों की तलाश करें।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि बैंकों को पश्चिम एशिया संकट और बदलते वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए अपनी तैयारियों और अनुकूलन क्षमता को मजबूत रखना चाहिए।
बैठक में पीएसबी के कारोबार में वृद्धि, लाभप्रदता, परिसंपत्ति गुणवत्ता, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, वित्तीय समावेश, डिजिटल प्रणाली, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) ऋण प्रवाह, साइबर सुरक्षा और परिचालन जोखिम प्रबंधन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में प्रदर्शन की समीक्षा की गई।
मंत्रालय ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने मजबूत वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन किया है।
पीएसबी का 31 मार्च 2026 तक कुल कारोबार लगभग 283.3 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि उनका शुद्ध लाभ बढ़कर लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो अब तक का सर्वाधिक वार्षिक शुद्ध लाभ है।
बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता भी मजबूत रही, जहां सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (जीएनपीए) घटकर 1.93 प्रतिशत के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गईं, जबकि शुद्ध एनपीए 0.39 प्रतिशत तक कम हुआ।
बैठक में जनधन योजना, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, पीएम विश्वकर्मा और डिजिटल ऋण कार्यक्रमों जैसी प्रमुख वित्तीय समावेश पहलों की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
मंत्रालय ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देश में वित्तीय पहुंच बढ़ाने और अंतिम छोर तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
भाषा योगेश रमण
रमण