एकल नोडल एजेंसी खाते में देरी से अटक सकता है 9.16 लाख मकानों का निर्माण

एकल नोडल एजेंसी खाते में देरी से अटक सकता है 9.16 लाख मकानों का निर्माण

एकल नोडल एजेंसी खाते में देरी से अटक सकता है 9.16 लाख मकानों का निर्माण
Modified Date: February 16, 2026 / 10:24 pm IST
Published Date: February 16, 2026 10:24 pm IST

पटना, 16 फरवरी (भाषा) बिहार के वित्त विभाग से एकल नोडल एजेंसी (एसएनए) खाता बनाने में हुई देरी के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 9.16 लाख से अधिक घरों का निर्माण चालू वित्त वर्ष में शुरू होने की संभावना कम है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सहित 37 अतिरिक्त योजनाओं के लिए 2026-27 से एसएनए स्पर्श मॉड्यूल को लागू करने का निर्देश दिया है।

एसएनए-स्पर्श मॉडल (एकल नोडल एजेंसी – वास्तविक समय में त्वरित निधि हस्तांतरण प्रणाली) केंद्र प्रायोजित योजनाओं (सीएसएस) के लिए निर्बाध, समय पर कोष प्रवाह के लिए केंद्र सरकार की एक पहल है।

राज्य के वित्त विभाग ने अभी तक ग्रामीण आवास के लिए वेब-आधारित प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) आवाससॉफ्ट को एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईएफएमआईएस) के साथ नहीं जोड़ा है, जो बिहार में मॉड्यूल को चालू करने के लिए एक पूर्व शर्त है।

राज्य में रुकी पड़ी ग्रामीण आवास परियोजनाओं को फिर से शुरू करने के लिए स्वीकृत 4,500 करोड़ रुपये में से ग्रामीण विकास विभाग को योजना के तहत लाभार्थियों को वितरित करने के लिए कम से कम 3,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता है।

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा, “हमने वित्त विभाग से एसएनए स्पर्श मॉड्यूल के क्रियान्वयन में तेजी लाने का अनुरोध किया था, लेकिन हमारे प्रयास सफल नहीं हुए। यदि समय पर राशि जारी नहीं की गई, तो नए मकानों का निर्माण नहीं हो पाएगा।”

बजट सत्र के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधान परिषद सदस्य सौरभ कुमार के एक गैर-तारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र ने जनवरी में 91 करोड़ रुपये जारी किए थे।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने 31 मार्च तक केंद्र से अतिरिक्त राशि मांगी है।’’

सौरभ कुमार ने कहा कि बिहार में पीएमएवाई (जी) योजना के तहत स्वीकृत 12.08 लाख घरों में से 2.91 लाख घर पूरे हो चुके हैं, जबकि 9.16 लाख घर अभी भी लंबित हैं।

उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या यह देरी पिछले पांच महीनों से केंद्रीय कोष जारी न होने के कारण हुई है।

मंत्री ने वित्त विभाग की ओर से ‘कुछ देरी’ होने की बात स्वीकार की, लेकिन कहा कि उन्होंने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री से मुलाकात की और 91 करोड़ रुपये की किस्त हासिल की।

उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष के अंत से पहले और अधिक धनराशि की मांग की गई है।

इस योजना के तहत, प्रत्येक लाभार्थी तीन किस्तों में 1.20 लाख रुपये प्राप्त करने के हकदार हैं।

भाषा रमण अजय

अजय


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