पश्चिम एशिया संकट जारी रहने से भारत में निवेश पर पड़ेगा नकारात्मक असरः रिपोर्ट

Ads

पश्चिम एशिया संकट जारी रहने से भारत में निवेश पर पड़ेगा नकारात्मक असरः रिपोर्ट

  •  
  • Publish Date - March 3, 2026 / 03:21 PM IST,
    Updated On - March 3, 2026 / 03:21 PM IST

नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) फिच ग्रुप की इकाई बीएमआई ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष भारत में निवेश को प्रभावित कर सकता है और यूरोपीय संघ एवं अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों से मिलने वाले सकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है।

बीएमआई ने अपनी ‘इंडिया आउटलुक’ रिपोर्ट में कहा कि यदि ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की वृद्धि होती है तो इससे भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर लगभग 0.3 से 0.6 प्रतिशत अंक तक का नकारात्मक असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट कहती है कि खासकर दक्षिण एशिया जैसे शुद्ध तेल आयातक देशों पर इस संकट का अधिक प्रभाव पड़ने का अनुमान है।

हालांकि, शोध एवं विश्लेषण इकाई बीएमआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान सात प्रतिशत पर बरकरार रखा है, जो चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 7.9 प्रतिशत वृद्धि से कम है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च से अनिश्चितता में तेज वृद्धि हो सकती है, क्योंकि पश्चिम एशिया संघर्ष से निवेश धारणा प्रभावित हो सकती है।

रिपोर्ट कहती है, “मार्च से अनिश्चितता में तेज बढ़ोतरी होने की आशंका है। हमें लगता है कि इससे भारत में निवेश हतोत्साहित होगा, जिससे ईयू और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों का सकारात्मक प्रभाव आंशिक रूप से कम हो सकता है।”

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने भी इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन एवं मिसाइलें दागीं।

इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी। यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 88 प्रतिशत आयात करता है। तेल कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल बढ़ेगा और ईंधन महंगाई पर दबाव पड़ेगा।

भारत और अमेरिका ने पिछले महीने अंतरिम व्यापार समझौते की एक रूपरेखा पर सहमति जताई थी, जिसके तहत शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने का प्रस्ताव है। हालांकि, इसे लागू करने के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

इस बीच, अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने फरवरी में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक जवाबी शुल्क को अवैध करार देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) के तहत मिले अधिकारों से अधिक कदम उठाया।

फैसले के बाद अमेरिका ने 24 फरवरी से 150 दिन के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगा दिया है। इस शुल्क को बाद में 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की घोषणा भी की गई लेकिन इस पर अभी कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।

उधर, भारत और यूरोपीय संघ के बीच जनवरी में मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर सहमति बनी। इस समझौते को कानूनी अनुमोदन मिलने के बाद एक वर्ष के भीतर लागू किया जाएगा।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय