बीते सप्ताह हल्के तेलों के दाम पामोलीन से सस्ता होने से सीपीओ, पामोलीन में गिरावट

बीते सप्ताह हल्के तेलों के दाम पामोलीन से सस्ता होने से सीपीओ, पामोलीन में गिरावट

बीते सप्ताह हल्के तेलों के दाम पामोलीन से सस्ता होने से सीपीओ, पामोलीन में गिरावट
Modified Date: November 29, 2022 / 09:01 pm IST
Published Date: November 14, 2021 12:08 pm IST

नयी दिल्ली, 14 नवंबर (भाषा) बीते सप्ताह देश के प्रमुख तेल-तिलहन बाजार में हल्के खाद्य तेलों के दाम पामोलीन से सस्ता होने के कारण सीपीओ और पामोलीन तेल के दाम गिरावट के रुख के साथ बंद हुए। जबकि मंडियों में मूंगफली, बिनौला की नई फसलों की आवक बढ़ने से इनके तेलों के भाव नरम बंद हुए।

देश में खाद्य तेल-तिलहनों पर ‘स्टॉक लिमिट’ लगाये जाने की खबरों के कारण कारोबारियों और सरसों मिलों द्वारा अपने सौदे खाली करने से सरसों तेल-तिलहन कीमतों में भी गिरावट आई। वहीं दूसरी ओर विदेशों में सोयाबीन के तेल रहित खल (डीओसी) की मांग बढ़ने से सोयाबीन दाना और लूज के भाव सुधार दर्शाते बंद हुए।

बाजार सूत्रों ने कहा कि विदेशों से सोयाबीन का आयात करना आयातकों को कहीं सस्ता पड़ता है जिसकी वजह से समीक्षाधीन सप्ताहांत में सोयाबीन तेल कीमतों में गिरावट आई है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्यों से खाद्य तेलों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जमाखोरी पर अंकुश लगाने के मकसद से ‘स्टॉक लिमिट’ के विकल्प पर विचार करने का अनुरोध किया है, जिसके बाद इस बंदिश के लागू होने के डर से कारोबारियों ने अपने स्टॉक खाली कर लिये जिसकी वजह से समीक्षाधीन सप्ताहांत में सरसों तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट है।

उन्होंने कहा कि इसके बाद सरसों की मांग फिर से कायम होने और स्टॉक समाप्त होने की आशंका से सरसों तेल-तिलहन में सुधार का रुख कायम हो गया। सरसों की बढ़ती मांग के बीच सलोनी शम्साबाद में सरसों का दाम पहले के 8,800 रुपये से बढ़ाकर 9,200 रुपये क्विंटल कर दिया गया। इसी प्रकार जयपुर में भी सरसों के दाम में 250 रुपये क्विंटल की वृद्धि कर दी गई।

उन्होंने कहा कि पामोलीन कांडला तेल का आयात करना महंगा पड़ता है और इस तेल के आयात में 3-4 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान है। मांग कमजोर होने से पहले इस तेल को अधिक नुकसान के साथ बेचा जाता था जिसे आयातकों ने कमतर घाटे पर बेचने का फैसला किया जिसकी वजह से पामोलीन कांडला तेल में सुधार दिख रहा है।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि तेल कारोबार के इतिहास में संभवत: पहली बार ऐसा हुआ है कि सूरजमुखी तेल का भाव आयातित पामोलीन से सस्ता है। उन्होंने कहा कि सूरजमुखी का तेल आज से छह महीने पहले सरसों तेल से 40 रुपये प्रति किलो ज्यादा था और पामोलीन से 55-60 रुपये प्रति किलो महंगा था। सूरजमुखी के आयात पर लगने वाला शुल्क 46-47 रुपये प्रति किलो था। वह अब घटकर सात रुपये प्रति किलो रह गया है।

देश में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल जैसे राज्यों में सूरजमुखी तेल की खपत वैसे ही होती है, जैसे उत्तर भारत में सरसों की। सरकार को यह देखना चाहिये कि सूरजमुखी के दाम कम होने के बावजूद उपभोक्ताओं को यह सस्ते में क्यों उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा में बिनौला की नयी फसल की आवक बढ़ने तथा गुजरात और राजस्थान में मूंगफली की नयी फसलों की आवक बढ़ने से बिनौला तेल और मूंगफली तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट आई।

सूत्रों ने कहा कि देश में जाड़े के मौसम और शादी-विवाह के सत्र के दौरान सरसों के मांग बढ़ने की उम्मीद है और इस बार किसानों ने सरसों खेती का रकबा भी बढ़ाया है और सरसों का वायदा कारोबार बंद रहने से इसका उत्पादन लगभग दोगुना बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को सरसों की तरह बाकी खाद्य तेलों के वायदा कारोबार पर भी अंकुश लगाने के बारे में सोचना चाहिये जो तिलहन तेल के मामले में आत्मनिर्भरता की राह की बड़ी बाधा है।

सूत्रों ने कहा कि विदेशों से आयातित 75 से 80 प्रतिशत तेलों पर स्टॉक की सीमा नहीं है, तो घरेलू तेलों पर इसे लगाने का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि किसानों की नई सोयाबीन और मूंगफली की फसल की आवक शुरू हो गई है। सरकार को इसके बजाय इनकी कीमतों की निगरानी करनी चाहिए।

सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाने का भाव 200 रुपये घटकर 8,770-8,795 रुपये प्रति क्विंटल रह गया, जो पिछले सप्ताहांत 8,970-8,995 रुपये प्रति क्विंटल था। सरसों दादरी तेल का भाव पिछले सप्ताहांत के मुकाबले 400 रुपये टूटकर समीक्षाधीन सप्ताहांत में 17,400 रुपये क्विंटल रह गया। वहीं सरसों पक्की घानी तेल की कीमत 20 रुपये घटकर 2,670-2,705 रुपये प्रति टिन रह गई जबकि सरसों कच्ची घानी तेल पूर्ववत बना रहा।

गिरावट के आम रुख के विपरीत सोयाबीन के तेल रहित खल (डीओसी) की स्थानीय मांग के बीच समीक्षाधीन सप्ताहांत में सोयाबीन दाने और सोयाबीन लूज के भाव क्रमश: 225 रुपये और 200 रुपये सुधरकर क्रमश: 5,700-5,800 रुपये और 5,525-5,575 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।

दूसरी ओर समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दिल्ली, सोयाबीन इंदौर और सोयाबीन डीगम के भाव क्रमश: 300 रुपये, 400 रुपये और 250 रुपये की हानि दर्शाते क्रमश: 13,350 रुपये, 13,000 रुपये और 11,750 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।

इस दौरान बिनौला तेल और मूंगफली की नई फसल की आवक शुरू होने के बाद मंडियों में भाव टूटने से मूंगफली का भाव समीक्षाधीन सप्ताहांत में 50 रुपये टूटकर 6,000-6,085 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। मूंगफली तेल गुजरात का भाव 250 रुपये की हानि के साथ 13,500 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। जबकि मूंगफली सॉल्वेंट रिफाइंड का भाव 25 रुपये की गिरावट के साथ 1,980-2,105 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।

जाड़े की कमजोर मांग और पामोलीन के महंगा होने से समीक्षाधीन सप्ताहांत में कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का भाव 100 रुपये की गिरावट के साथ 11,100 रुपये क्विंटल रह गया। जबकि पामोलीन दिल्ली का भाव 50 रुपये की हानि के साथ 12,750 रुपये क्विंटल पर बंद हुआ। दूसरी ओर पहले के अधिक नुकसान के मुकाबले आयातकों द्वारा कम नुकसान के साथ बिक्री करने की वजह से पामोलीन कांडला तेल के भाव में सुधार दिखा और इसकी कीमत 30 रुपये सुधरकर 11,680 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुई।

भाषा राजेश

अजय

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