किसी व्यक्ति को आरोपी बनाए बिना भी कंपनी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल सकता है: न्यायालय

किसी व्यक्ति को आरोपी बनाए बिना भी कंपनी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल सकता है: न्यायालय

किसी व्यक्ति को आरोपी बनाए बिना भी कंपनी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल सकता है: न्यायालय
Modified Date: September 7, 2026 / 07:35 pm IST
Published Date: September 7, 2026 7:35 pm IST

नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी कंपनी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही केवल इस आधार पर खत्म नहीं की जा सकती कि जांच एजेंसी ने उस निदेशक, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की पहचान नहीं की है या उसे आरोपी नहीं बनाया है, जिसके जरिये कथित अपराध किया गया।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने यह फैसला सनोफी इंडिया लिमिटेड की अपील पर सुनाया।

कंपनी ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही खत्म करने से इनकार किया गया था। पीठ ने कंपनी की अपील खारिज कर दी।

यह मामला भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) के लिए दवाओं की कथित खरीद से जुड़े केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के मामले से संबंधित था।

सीबीआई के आरोपपत्र में कहा गया था कि बीएआरसी के एक अधिकारी ने सनोफी इंडिया इंडिया के साथ मिलकर बढ़ी हुई कीमतों पर दवाओं की खरीद की साजिश रची। आरोप था कि अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले रिश्वत भी दी गई।

हालांकि, आरोपपत्र में सनोफी इंडिया इंडिया के किसी कर्मचारी, अधिकारी या निदेशक को कंपनी के साथ आरोपी नहीं बनाया गया था।

सनोफी इंडिया इंडिया ने इसी आधार पर आपराधिक कार्यवाही खत्म करने की अपील की थी।

कंपनी का कहना था कि उसके खिलाफ आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता क्योंकि उसकी अपनी कोई आपराधिक मंशा नहीं हो सकती।

उसने यह भी दलील दी थी कि दोषी पाए जाने पर कंपनी को जेल भी नहीं भेजा जा सकता।

न्यायमूर्ति पारदीवाला ने 98 पृष्ठ के फैसले में कंपनियों के आपराधिक दायित्व से जुड़े कानून और सिद्धांतों की विस्तार से व्याख्या की।

पीठ ने कहा कि किसी कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला चलाने के लिए यह जरूरी नहीं है कि जांच के शुरुआती चरण में उस व्यक्ति की पहचान भी हो जाए, जिसके कृत्य और मानसिक स्थिति को कंपनी से जोड़ा जा रहा है।

न्यायालय ने कहा कि किसी विशिष्ट व्यक्ति की पहचान न होना अपने आप में कंपनी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही खत्म करने का आधार नहीं है। हालांकि, आरोपपत्र में प्रथम दृष्टया यह दिखना चाहिए कि कंपनी की भूमिका कथित अपराध में थी।

भाषा

योगेश अजय

अजय


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