मुंबई, 20 फरवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस महीने की शुरुआत में हुई मौद्रिक समीक्षा बैठक के दौरान प्रमुख ब्याज दर को यथावत रखने के पक्ष में मतदान किया था। उनका मत था कि मजबूत आर्थिक वृद्धि और नियंत्रण में रहती मुद्रास्फीति को देखते हुए वर्तमान नीतिगत दर उचित है।
आरबीई ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की इस बैठक का ब्योरा शुक्रवार को जारी किया। चार से छह फरवरी तक आयोजित एमपीसी की बैठक के बाद अल्पकालिक ऋण दर (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा गया था।
इस बैठक में आरबीआई गवर्नर और एमपीसी के पांच अन्य सदस्यों ने रेपो दर को स्थिर रखने के पक्ष में मतदान किया था।
ब्योरे के मुताबिक, मल्होत्रा ने एमपीसी बैठक में तर्क दिया कि बाहरी क्षेत्र सहित मध्यम अवधि में भारत के व्यापक आर्थिक बुनियादी आंकड़े स्वस्थ और मजबूत बने हुए हैं।
गवर्नर ने कहा, ‘अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और इसके परिदृश्य, मजबूत वृद्धि एवं अनुकूल मुद्रास्फीति, को देखते हुए मुझे लगता है कि वर्तमान नीतिगत दर उचित है। लिहाजा, मैं रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने और ‘तटस्थ रुख’ बनाए रखने के लिए मतदान करता हूं।’
आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने बैठक में कहा कि अर्थव्यवस्था के ताजा और मजबूत संकेतों (त्वरित संकेतकों) और अनुमानों के आधार पर, विभिन्न एजेंसियों ने 2026-27 के लिए वृद्धि दर के शुरुआती अनुमानों को बढ़ा दिया है।
आरबीआई ने सकारात्मक अल्पकालिक परिदृश्य और हालिया व्यापार समझौतों को देखते हुए 2026-27 की पहली एवं दूसरी तिमाही के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुमानों को भी थोड़ा बढ़ा दिया है।
गुप्ता ने कहा, ‘पिछली छह में से चार बैठकों में नीतिगत दरों में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की जा चुकी है। दिसंबर 2025 में घोषित पिछली दर कटौती का असर अब भी पूरी तरह दिखना बाकी है। साथ ही, जीडीपी और मुद्रास्फीति दोनों की नयी शृंखला के आंकड़ों का इंतजार है, लिहाजा अभी एक और कटौती उचित नहीं है।’
घरेलू व्यापक आर्थिक स्थितियों और भविष्य के परिदृश्य की व्यापक समीक्षा के आधार पर, एमपीसी का विचार था कि वर्तमान नीतिगत दर उचित है और उसने मौजूदा दर को ही जारी रखने का फैसला किया।
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सुमित प्रेम
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