परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाए डीएई: टीसीई
परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाए डीएई: टीसीई
मुंबई, 30 अगस्त (भाषा) देश के परमाणु कार्यक्रम से पांच दशक से अधिक समय से जुड़ी टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (टीसीई) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमित शर्मा ने कहा कि कंपनी का मानना है कि परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) को अब अपने रणनीतिक उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र के साथ अधिक काम करना चाहिए।
टीसीई के प्रबंध निदेशक अमित शर्मा ने कहा कि मुंबई मुख्यालय वाले डीएई को अपने सरकारी क्षेत्र के अंतरिक्ष समकक्ष भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से सीख लेनी चाहिए, जिसने निजी क्षेत्र के विकास की गति तेज करने में मदद की है।
शर्मा ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘डीएई का गठन राष्ट्रीय रणनीतिक उद्देश्यों के लिए किया गया था, बिजली पैदा करने के लिए नहीं। उसे अपनी मूल पहचान बरकरार रखनी चाहिए और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में निजी क्षेत्र को पूरी तरह काम करने देना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि मुंबई स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) की प्रयोगशालाओं जैसी सुविधाएं निजी क्षेत्र के लिए उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे अपनी अवधारणाओं का परीक्षण कर सकें। चीन, अमेरिका और दक्षिण कोरिया समेत कई अन्य देश पहले ही संरचित पहल के जरिये ऐसा कर रहे हैं।
कंपनी का मानना है कि ‘शांति’ अधिनियम पारित होने के बाद परमाणु क्षेत्र में कारोबार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा हुए हैं। इस कानून में परमाणु दुर्घटनाओं से जुड़ी दायित्व संबंधी चिंताओं को दूर किया गया है।
शर्मा ने कहा कि टीसीई जटिल परमाणु बिजली संयंत्र स्थापित करने के लिए व्यवहार्यता अध्ययन और अन्य कार्यों में जेएसडब्ल्यू, रिलायंस इंडस्ट्रीज और बजाज समूह समेत कई कंपनियों और समूहों के साथ काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि टीसीई के मौजूदा 3,000 करोड़ रुपये के राजस्व में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब दो प्रतिशत है। निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने के साथ वित्त वर्ष 2029-30 के अंत तक इसके बढ़कर पांच से छह प्रतिशत होने की उम्मीद है।
भाषा योगेश अजय
अजय

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