दाइकी एक्सिस भारत में लगाएगी तीसरा संयंत्र, टिकाऊ जल शोधन में विस्तार पर बड़ा दांव

दाइकी एक्सिस भारत में लगाएगी तीसरा संयंत्र, टिकाऊ जल शोधन में विस्तार पर बड़ा दांव

दाइकी एक्सिस भारत में लगाएगी तीसरा संयंत्र, टिकाऊ जल शोधन में विस्तार पर बड़ा दांव
Modified Date: July 12, 2026 / 05:29 pm IST
Published Date: July 12, 2026 5:29 pm IST

नयी दिल्ली, 12 जुलाई (भाषा) जापान की जल शोधन समाधान कंपनी दाइकी एक्सिस भारत में टिकाऊ अपशिष्ट जल शोधन और जल पुन: उपयोग समाधान की बढ़ती मांग को देखते हुए कर्नाटक के तुमकुरु में अपना तीसरा विनिर्माण संयंत्र स्थापित करेगी। कंपनी इस परियोजना में करीब 200 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।

कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली भारतीय इकाई दाइकी एक्सिस इंडिया के माध्यम से स्थापित किए जाने वाले इस संयंत्र में जापान की स्वामित्व वाली ‘जोखासो’ प्रौद्योगिकी पर आधारित सीवरेज उपचार प्रणालियों का निर्माण और संयोजन किया जाएगा। यह प्रौद्योगिकी विकेंद्रीकृत तरीके से अपशिष्ट जल के उपचार और उसके पुन: उपयोग को सक्षम बनाती है।

दाइकी एक्सिस इंडिया के सलाहकार के. सी. पांडेय ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच उन्नत अपशिष्ट जल शोधन प्रौद्योगिकियों के लिए व्यापक संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कर्नाटक संयंत्र घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करेगा, आयात पर निर्भरता कम करेगा और देशभर में अपशिष्ट जल उपचार समाधान की उपलब्धता बढ़ाने में मदद करेगा।

पांडेय के अनुसार, भारत अपशिष्ट जल उपचार और जल के पुन: उपयोग समाधान के लिए दुनिया के सबसे संभावनाशील बाजारों में से एक है।

उन्होंने कहा कि जल संकट और शहरी बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव के बीच भारत में ‘जहां उपचार, वहीं पुन: उपयोग’ की अवधारणा को तेजी से अपनाया जा रहा है।

पांडेय ने कहा, ‘‘भारत में 24,000 से अधिक शहरी पार्कों के अलावा हजारों आवासीय परिसरों, संस्थानों, होटलों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में उपचारित अपशिष्ट जल का इस्तेमाल बागवानी, हरित क्षेत्र के रखरखाव और गैर-पेयजल जरूरतों के लिए किया जा सकता है।’’

उन्होंने कहा कि दाइकी एक्सिस का विस्तार केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल और ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है। इसका उद्देश्य विश्वस्तरीय शहरी बुनियादी ढांचा, टिकाऊ जल प्रबंधन और बेहतर स्वच्छता व्यवस्था विकसित करना है।

भाषा योगेश अजय

योगेश यासिर

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