यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने का फैसला वापस नहीं होगा : शीर्ष अधिकारी
यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने का फैसला वापस नहीं होगा : शीर्ष अधिकारी
नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) सरकार ने बुधवार को स्पष्ट किया कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करने या इसे वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता है।
सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने बड़े यूपीआई भुगतान पाने वाले व्यापारियों पर प्रस्तावित शुल्क ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) को वापस लेने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर कहा कि यह फैसला लिया जा चुका है और इसे पलटने का सवाल ही नहीं है।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि 2,000 रुपये से बड़े यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने का फैसला व्यापक रूप से यूपीआई पारिस्थितिकी के हित में और इसकी सुरक्षा एवं संरक्षा मजबूत करने के लिए किया गया है।
उन्होंने कहा कि अन्य देशों में भी ऐसी शुल्क व्यवस्था है और नई एमडीआर व्यवस्था यूपीआई को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी।
हालांकि, सरकार के इस फैसले का व्यापारियों, दुकानदारों और कुछ राजनीतिक दलों समेत कई वर्गों ने विरोध किया है। कुछ लोगों ने इसे ‘मोदी टैक्स’ भी कहा है। कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी दबाव में आने का आरोप भी लगाया है।
सरकार ने मंगलवार को कहा था कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में यूपीआई के विस्तार तथा इसकी प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए प्रोत्साहन भी दिए जाएंगे और अधिकांश भुगतान शुल्क-मुक्त रहेंगे।
संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने अपनी 32वीं रिपोर्ट में शून्य-एमडीआर व्यवस्था से सरकारी वित्त पर पड़ने वाले दबाव को रेखांकित किया था। समिति ने कहा था कि इससे भुगतान पारिस्थितिकी की दीर्घकालिक बुनियादी ढांचे में निवेश की क्षमता सीमित होती है और इसे वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने के लिए एक व्यावहारिक राजस्व व्यवस्था जरूरी है।
लगभग छह साल तक पूरी तरह शुल्क-मुक्त रहने के बाद सरकार ने मंगलवार को ऐलान किया कि 15 अक्टूबर से व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगेगा। हालांकि, दो व्यक्तियों के बीच भुगतान और छोटे भुगतान को शुल्क से मुक्त रखा गया है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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