नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने जापानी दवा कंपनी दाइची सैंक्यो के पक्ष में पारित 3,500 करोड़ रुपये के मध्यस्थता पंचाट निर्णय से जुड़े शेयर लेनदेन की जांच के लिए सोमवार को एक फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया। यह मामला फोर्टिस के पूर्व प्रवर्तकों मलविंदर मोहन सिंह और शिविंदर मोहन सिंह से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने एस रामानंद अय्यर एंड कंपनी को फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त करते हुए छह महीने में जांच पूरी करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि जांच का उद्देश्य घटनाक्रम की पूरी कड़ी की पहचान और पुनर्निर्माण करना है, ताकि शेयरों के कथित हस्तांतरण में शामिल व्यक्तियों और कंपनियों का पता लगाया जा सके।
अदालत ने दाइची की उन अर्जियों को मंजूर किया, जिनमें फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड (एफएचएल), सिंह बंधुओं और अन्य के बीच हुए लेनदेन की जांच के लिए फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की गई थी।
दाइची का आरोप है कि इन लेनदेन के कारण ऐसी संपत्तियां कम हो गईं, जिनसे उसके पक्ष में पारित आदेश के तहत देय राशि की वसूली की जा सकती थी।
अदालत ने फोर्टिस हेल्थकेयर में फोर्टिस हेल्थकेयर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड (एफएचएचपीएल) की हिस्सेदारी में आई तेज गिरावट का भी उल्लेख किया। इस कंपनी का नियंत्रण सिंह बंधुओं के पास था।
उच्च न्यायालय ने कहा कि लेनदेन का एक-एक कर विश्लेषण करने के बजाय विशेषज्ञ के जरिये इनकी पड़ताल करना अधिक उचित होगा। ऑडिटर यह भी जांचेगा कि इन लेनदेन में फोर्टिस हेल्थकेयर की कोई भूमिका थी या नहीं और क्या इनमें भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियमों का उल्लंघन हुआ।
फॉरेंसिक ऑडिटर को 24 मई, 2016 के बाद एफएचएचपीएल की फोर्टिस हेल्थकेयर में हिस्सेदारी से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच करने को कहा गया है। इसमें हिस्सेदारी में कमी, गिरवी और गैर-गिरवी शेयरों का हस्तांतरण, नई गिरवी तथा हिस्सेदारी को प्रभावित करने वाले अन्य लेनदेन शामिल हैं।
सिंगापुर के एक न्यायाधिकरण ने 2016 में दाइची के पक्ष में करीब 3,500 करोड़ रुपये का निर्णय दिया था। यह मामला 2008 में सिंह बंधुओं द्वारा अपनी कंपनी रैनबैक्सी के शेयर दाइची को 9,576.1 करोड़ रुपये में बेचे जाने से जुड़ा था। दाइची ने आरोप लगाया था कि शेयरों की बिक्री के समय सिंह बंधुओं ने रैनबैक्सी के खिलाफ अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) और न्याय विभाग की जांच से जुड़ी जानकारी छिपाई थी।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 31 जनवरी, 2018 को इस अंतरराष्ट्रीय पंचाट के फैसले को बरकरार रखा था। इसके खिलाफ सिंह बंधुओं की अपील को उच्चतम न्यायालय ने 16 फरवरी, 2018 को खारिज कर दिया था।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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