धादिंग (नेपाल), 31 अगस्त (एपी) मध्य नेपाल में बाढ़ से तबाह एक बिजलीघर से कर्मचारी कीचड़ और मलबा हटाकर उसे फिर से चालू करने की कोशिश कर रहे हैं। यह बिजलीघर 20,000 से अधिक लोगों को बिजली आपूर्ति करने वाला एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
पिछले सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ से क्षतिग्रस्त उपकरणों को साफ करने के बीच उम्मीद है कि बिजलीघर को उसी नदी के किनारे फिर से नहीं बनाया जाएगा, जिसने उसे तबाह कर दिया था।
नेपाल में हाल में आई भीषण बाढ़ ने हिमालय क्षेत्र में जलविद्युत परियोजनाओं की कमजोरियों और उनसे जुड़े बढ़ते जोखिमों को उजागर किया है।
नेपाल के इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अनुसार, देश में एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े 900 तक कर्मचारी लापता हैं। इनमें से सैकड़ों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। नेपाल और चीन को मिलाकर 900 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,700 लोग लापता हैं।
आपदा विशेषज्ञों ने कहा कि जलविद्युत बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण करीब 700 मेगावाट बिजली उत्पादन बंद हो गया है, जो देश की कुल बिजली क्षमता का लगभग 10 प्रतिशत है।
ऑस्ट्रिया के ग्राज विश्वविद्यालय के भू-विज्ञानी जैकब स्टीनर ने कहा, ‘‘अब अधिकारियों को आत्ममंथन करते हुए गंभीरता से विचार करना होगा कि वे इन जगहों पर दोबारा निर्माण किस तरह करेंगे। उन्हें नेपाल की उन अन्य परियोजनाओं पर भी बारीकी से नजर डालनी होगी, जिनका अभी निर्माण नहीं हुआ है और यह तय करना होगा कि इस घटना के बाद उन्हें मंजूरी दी जाएगी या नहीं।’’ स्टीनर फिलहाल बांग्लादेश के ढाका में हैं।
सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में संचालित या निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाएं पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट हो गईं।
अधिकारियों के अनुसार, कई कर्मचारियों ने सुरंगों में शरण ली थी, लेकिन वे वहीं फंस गए हैं और बचाव अभियान का इंतजार कर रहे हैं।
स्टीनर ने बताया, ‘‘ये सुरंगें जलविद्युत बुनियादी ढांचे तक पहुंचने और पानी का रुख मोड़ने के लिए बनाई जाती हैं।’’
‘कोएलिशन फॉर डिज़ास्टर रेज़िलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर’ (सीडीआरआई) के वरिष्ठ निदेशक रामराज नरसिम्हन ने कहा कि पुनर्निर्माण का ध्यान हर ढांचे को पूरी तरह क्षति-रोधी बनाने के बजाय सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने पर होना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई ढांचा क्षतिग्रस्त होता है तो होने दें, लेकिन क्या हम व्यवस्था में वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित कर सकते हैं?’’
नरसिम्हन ने कहा कि इसके तहत निर्माण के लिए बेहतर स्थान चुनना, वैकल्पिक मार्ग तैयार करना, बिजली व्यवस्था करना, बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करना और बीमा जैसे वित्तीय साधनों का इस्तेमाल करना शामिल हो सकता है, ताकि आपदा के बाद जल्द से जल्द व्यवस्था बहाल की जा सके।
उन्होंने कहा कि जोखिम का आकलन करते समय यह देखा जाना चाहिए कि नदी कहां मोड़ लेती है, किन जगहों पर ढलान अस्थिर हैं और ऐसी कौन-सी जगहें हैं, जहां किसी एक ढांचे के नाकाम होने से कई समुदायों का संपर्क कट सकता है।
एपी आशीष नरेश
नरेश