आर्थिक वृद्धि है वित्तीय समावेश का सबसे मजबूत स्वरूपः सीईए नागेश्वरन

आर्थिक वृद्धि है वित्तीय समावेश का सबसे मजबूत स्वरूपः सीईए नागेश्वरन

आर्थिक वृद्धि है वित्तीय समावेश का सबसे मजबूत स्वरूपः सीईए नागेश्वरन
Modified Date: January 13, 2026 / 10:09 pm IST
Published Date: January 13, 2026 10:09 pm IST

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने मंगलवार को कहा कि आर्थिक वृद्धि ही वित्तीय समावेश का सबसे मजबूत एवं टिकाऊ स्वरूप है।

नागेश्वरन ने यहां आयोजित ‘ग्लोबल इन्क्लूसिव फाइनेंस’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘जब अर्थव्यवस्था रोजगार, आय, बाजार और मांग पैदा करती है तो लोगों को वित्तीय प्रणाली में जबरन लाने की जरूरत नहीं पड़ती है। जब लोगों को भविष्य वर्तमान से बड़ा लगता है, तो वे स्वाभाविक रूप से वित्तीय प्रणाली का हिस्सा बनते हैं।’

उन्होंने कहा, “कोई भी वित्तीय संस्था वह नहीं दे सकती जो आर्थिक वृद्धि दे सकती है। वित्त, वृद्धि का पूरक है, उसका विकल्प नहीं।”

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नागेश्वरन ने कहा कि जहां आजीविका ठहरी हुई होती है, वहां वित्तीय समावेश कमजोर रहता है, जबकि आजीविका के विस्तार की स्थिति में समावेश अपने आप सुदृढ़ होता जाता है। यदि वित्त को वास्तविक आर्थिक गतिविधियों के साथ सही ढंग से जोड़ा जाए, तो वह वृद्धि का शक्तिशाली उत्प्रेरक बन सकता है।

नागेश्वरन ने ‘प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना’ का उदाहरण देते हुए कहा कि महामारी के समय सर्वाधिक प्रभावित हुए रेहड़ी-पटरी दुकानदारों ने कार्यशील पूंजी तक पहुंच का उपयोग केवल जीवित रहने के लिए नहीं, बल्कि कारोबार बढ़ाने, बुनियादी परिसंपत्तियों में निवेश करने और अधिक टिकाऊ व्यवसाय खड़ा करने के लिए किया और यही वित्तीय समावेश का वास्तविक अर्थ है।

उन्होंने कहा कि बैंकों को सरकारी ऋण सहायता योजनाओं से आगे बढ़ चुके लाभार्थियों को अपने मुख्य पोर्टफोलियो में शामिल करना चाहिए। साथ ही, समावेशी वित्त संस्थानों में निवेश करने वालों को यह स्वीकार करना होगा कि सामाजिक लाभ के बदले वित्तीय प्रतिफल कम मिलेगा।

इसके साथ ही सीईए ने आगाह किया कि बिना सोचे-समझे कर्ज देने से वित्तीय समावेश का उद्देश्य नष्ट हो जाता है और इससे सशक्तीकरण के बजाय कर्ज का बोझ और तनाव बढ़ता है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


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