अर्थव्यवस्था के समक्ष पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी चुनौतियां, अल नीनो से कृषि उपज पर असरः आरबीआई
अर्थव्यवस्था के समक्ष पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी चुनौतियां, अल नीनो से कृषि उपज पर असरः आरबीआई
मुंबई, 29 मई (भाषा) वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियां पैदा हो सकती हैं, जबकि ‘अल नीनो’ के मौसमी प्रभावों से कृषि उत्पादन पर असर पड़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को अपनी वार्षिक रिपोर्ट में यह कहा।
हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियों और बैंकों के मजबूत बहीखाते, पूंजीगत व्यय पर सरकार के निरंतर जोर और प्रमुख व्यापार साझेदारों के साथ व्यापार समझौतों के क्रियान्वयन से निवेश और वृद्धि की रफ्तार बनी रहने की उम्मीद है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान आरबीआई के कामकाज को समाहित करने वाली इस रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू अर्थव्यवस्था ने बाहरी चुनौतियों के बावजूद जुझारूपन दिखाया, जिसे मजबूत निजी उपभोग, निवेश और व्यापक आर्थिक स्थिरता से समर्थन मिला।
रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष (2026-27) के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था का परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे जुड़े जोखिम आर्थिक वृद्धि एवं मुद्रास्फीति पर दबाव डाल सकते हैं।
कृषि क्षेत्र के बारे में आरबीआई ने कहा कि इसका प्रदर्शन दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति और उसके वितरण पर निर्भर करेगा। इस साल प्रतिकूल मौसमी स्थिति ‘अल नीनो’ बनने की संभावना कृषि उत्पादन के लिए नकारात्मक जोखिम पैदा कर सकती है।
भारतीय मौसम-विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने जून से सितंबर के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश में वर्षा दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के 90 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में सामान्य बारिश का अनुमान है, जबकि अन्य हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है।
कीमतों में बढ़ोतरी पर यह रिपोर्ट कहती है कि पर्याप्त अनाज भंडार एवं जलाशयों के स्तर को देखते हुए 2026-27 में मुद्रास्फीति लक्ष्य के अनुरूप रह सकती है। लेकिन वैश्विक कच्चे तेल और जिंस कीमतों में उछाल, आपूर्ति लागत में बढ़ोतरी और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव जैसे कारक जोखिम पैदा कर सकते हैं।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।
रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई का बैलेंस शीट मार्च, 2026 को 91,97,121.08 करोड़ रुपये हो गया जबकि 31 मार्च, 2025 को यह 76,25,421.93 करोड़ रुपये था। इस तरह एक वित्त वर्ष में बैलेंस शीट में 15,71,699.15 करोड़ रुपये यानी 20.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
आरबीआई ने कहा कि परिसंपत्तियों में वृद्धि घरेलू निवेश, सोने और विदेशी निवेश में क्रमशः 44.9 प्रतिशत, 63.8 प्रतिशत और 7.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी के कारण हुई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 31 मार्च, 2026 तक रिजर्व बैंक के पास कुल 880.52 टन सोना था, जो एक वर्ष पहले 879.58 टन था। इस दौरान सोने में 0.94 टन की वृद्धि दर्ज की गई। इनमें से 312.32 टन सोना ‘निर्गम विभाग’ की परिसंपत्ति के रूप में रखा गया, जबकि शेष 568.20 टन सोना बैंकिंग विभाग के मातहत है।
बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों में 2025-26 के दौरान धोखाधड़ी के 10,114 मामले दर्ज किए गए, जिनमें कुल 48,021 करोड़ रुपये शामिल थे। इसके एक साल पहले 23,722 मामलों में 32,803 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी दर्ज की गई थी।
रिपोर्ट कहती है कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों की संख्या घटने के बावजूद इन मामले में शामिल राशि पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है।
आरबीआई के अनुसार, 2025-26 में धोखाधड़ी के सबसे अधिक मामले ऋण श्रेणी में दर्ज किए गए, जबकि 2023-24 और 2024-25 में कार्ड, इंटरनेट और डिजिटल भुगतान से जुड़े मामले अधिक थे।
नकली मुद्रा के मामलों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। 2025-26 में बैंकिंग प्रणाली में कुल 2,29,746 नकली नोट पकड़े गए, जो एक साल पहले के मुकाबले 5.7 प्रतिशत अधिक हैं। इनमें सबसे अधिक नकली नोट 500 रुपये के थे, जिनकी संख्या 20.5 प्रतिशत बढ़कर 1,41,907 हो गई।
इसी अवधि में 500 रुपये के नोटों का चलन भी 11.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 7,05,482 लाख इकाई तक पहुंच गया। वहीं, मूल्य के लिहाज से 500 रुपये के नोटों का कुल चलन 35.27 लाख करोड़ रुपये रहा, जो साल भर पहले 31.72 लाख करोड़ रुपये था।
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
रमण

Facebook


