अदाणी टोटल गैस का शुद्ध लाभ जून तिमाही में 18 प्रतिशत घटकर 133 करोड़ रुपये पर

अदाणी टोटल गैस का शुद्ध लाभ जून तिमाही में 18 प्रतिशत घटकर 133 करोड़ रुपये पर

अदाणी टोटल गैस का शुद्ध लाभ जून तिमाही में 18 प्रतिशत घटकर 133 करोड़ रुपये पर
Modified Date: July 21, 2026 / 06:02 pm IST
Published Date: July 21, 2026 6:02 pm IST

नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) अदाणी टोटल गैस लिमिटेड (एटीजीएल) का चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में शुद्ध लाभ 18 प्रतिशत घटकर 133 करोड़ रुपये रह गया। पश्चिम एशिया संकट के बाद गैस कीमतों में तेज बढ़ोतरी इस गिरावट की मुख्य वजह रही।

अदाणी समूह और फ्रांस की टोटलएनर्जीज के संयुक्त उपक्रम एटीजीएल ने मंगलवार को एक बयान में अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे की जानकारी दी। एक साल पहले की समान तिमाही में उसे 162 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था।

हालांकि, आलोच्य तिमाही में सीएनजी की अधिक बिक्री होने से कंपनी की आय 27 प्रतिशत बढ़कर 1,910 करोड़ रुपये हो गई। इस दौरान प्राकृतिक गैस की लागत 39 प्रतिशत बढ़कर 1,454 करोड़ रुपये हो गई।

एटीजीएल ने कहा कि उसने लागत वृद्धि को ग्राहकों तक सीमित रूप से पहुंचाने का तरीका अपनाया ताकि खपत पर असर न पड़े।

इस दौरान सीएनजी की मात्रा सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़ी, जबकि पाइप वाली रसोई गैस (पीएनजी) के कनेक्शन बढ़कर 11.41 लाख हो गए।

कंपनी ने कहा कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद पीएनजी की खपत में सालाना आधार पर चार प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे कुल गैस खपत 13 प्रतिशत बढ़ी।

बीती तिमाही में कंपनी के सीएनजी स्टेशन की संख्या पांच बढ़कर 707 हो गई जबकि पीएनजी घरेलू कनेक्शन 38,000 से अधिक बढ़कर 11.41 लाख हो गए। औद्योगिक और वाणिज्यिक कनेक्शन 448 नए ग्राहकों के साथ बढ़कर 10,422 हो गए।

एटीजीएल की ई-परिवहन इकाई अदाणी टोटलएनर्जीज ई-मोबिलिटी लिमिटेड ने अपने ईवी चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार कर 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 226 शहरों में 5,306 चार्जिंग पॉइंट लगाए हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 58 मेगावाट है।

एटीजीएल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) संजय पंडिता ने कहा कि ऊंची गैस कीमतें, ब्रेंट क्रूड में बढ़ोतरी, मुद्रा उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बनाया है।

उन्होंने कहा, “इन परिस्थितियों के बावजूद हमारा ध्यान गैस आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने, परिचालन दक्षता बढ़ाने, उपभोक्ताओं को जोखिम से बचाने और दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर रहा है।”

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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