ऊर्जा से जुड़ी जानकारी अब राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला, कंपनियों के लिए खुलासा करना होगा अनिवार्य

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ऊर्जा से जुड़ी जानकारी अब राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला, कंपनियों के लिए खुलासा करना होगा अनिवार्य

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  • Publish Date - March 19, 2026 / 03:37 PM IST,
    Updated On - March 19, 2026 / 03:37 PM IST

नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) सरकार ने ऊर्जा से जुड़ी जानकारी को राष्ट्रीय सुरक्षा मामले के रूप में वर्गीकृत किया है। इससे तेल एवं गैस क्षेत्र से जुड़ी सभी इकाइयों के लिए विस्तृत परिचालन जानकारी प्रदान करना अनिवार्य हो गया है।

पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस (सूचना प्रदान करना) आदेश, 2026 के तहत सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की रिफाइनरी कंपनियों, एलएनजी आयातकों, पाइपलाइन संचालकों, शहरी गैस वितरकों और पेट्रोरसायन कंपनियों को पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) को नियमित रूप से (कुछ मामलों में दैनिक आधार पर) विस्तृत जानकारी देनी होगी। ।

मंत्रालय की 18 मार्च को जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, इस आदेश में उत्पादन, आयात, भंडार स्तर और खपत के प्रतिरूप से संबंधित आंकड़े और जानकारी शामिल है। यह मौजूदा गोपनीयता प्रावधानों को निरस्त करता है।

पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण गैस और एलपीजी आपूर्ति बाधित होने के बाद ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं में वृद्धि के बीच यह कदम उठाया गया है।

भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस का 50 प्रतिशत और एलपीजी का 60 प्रतिशत आयात करता है।

युद्ध शुरू होने से पहले, भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता था। एलपीजी का 85 से 95 प्रतिशत और गैस का 30 प्रतिशत हिस्सा भी इसी जलडमरूमध्य से आता था।

युद्ध के कारण यह जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद हो गया है। इससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है।

हालांकि, कच्चे तेल की आपूर्ति में आई रुकावट की भरपाई रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लातिनी अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आंशिक रूप से की गई है। लेकिन खाड़ी देशों से आपूर्ति में कमी के कारण औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को गैस और एलपीजी की आपूर्ति सीमित हुई है।

मंत्रालय के इस आदेश का मकसद आपूर्ति में आने वाली रुकावटों पर त्वरित कदम उठाने, बिजली, उर्वरक और घरेलू एलपीजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता देने और खरीद संबंधी बेहतर निर्णय लेने के लिए एक केंद्रीकृत, वास्तविक समय पर उपलब्ध आंकड़ा रूपरेखा तैयार करना है।

अधिकारियों ने कहा कि इस पहल से भारत की आपूर्ति श्रृंखलाओं की निगरानी करने, बचे भंडार का प्रबंधन करने और वैश्विक झटकों के प्रति जोखिम को कम करने की क्षमता मजबूत होगी।

नियामक ढांचे के सख्त होने के साथ ही कंपनियों को अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए ‘डेटा रिपोर्टिंग’ प्रणाली को अत्याधुनिक बनाना होगा।

अधिकारियों ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा न केवल स्रोत पर बल्कि आपूर्ति श्रृंखला में वास्तविक समय की पारदर्शिता पर भी निर्भर करेगी।

मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत शक्ति का उपयोग करते हुए आदेश जारी किया। यह अधिनियम केंद्र सरकार को किसी भी आवश्यक वस्तु का भंडार रखने, उत्पादन करने, आयात करने, निर्यात करने या व्यापार करने वाले किसी भी व्यक्ति से उत्पादन, आपूर्ति, वितरण, स्टॉक या उपयोग से संबंधित ऐसी जानकारी प्रस्तुत करने की मांग करने का अधिकार देता है।

केंद्र सरकार ने कहा कि जनहित में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस आपूर्ति श्रृंखला की प्रभावी निगरानी के लिए इस प्रकार की सूचनाओं के व्यवस्थित संग्रह, संकलन और विश्लेषण को लेकर एक केंद्रीकृत संस्थागत प्रणाली स्थापित करना आवश्यक है।

आदेश में कहा गया, ‘‘पेट्रोलियम उत्पादों या प्राकृतिक गैस के उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, आयात, निर्यात, विपणन, वितरण या उपभोग में शामिल प्रत्येक इकाई को पीपीएसी को पेट्रोलियम उत्पादों या प्राकृतिक गैस के उत्पादन, आयात, निर्यात, भंडार, आवंटन, परिवहन, आपूर्ति, उपभोग और उपयोग से संबंधित जानकारी… आदि सूचना देनी होगी।’’

यह आदेश कच्चे तेल उत्पादकों और आयातकों, तेल शोधन कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों, पेट्रोलियम भंडारण और टर्मिनल संचालकों, प्राकृतिक गैस उत्पादकों, एलएनजी आयातकों और एलएनजी टर्मिनल संचालकों, प्राकृतिक गैस पाइपलाइन संचालकों, गैस विपणनकर्ताओं और सिटी गैस वितरण इकाइयों, प्राकृतिक गैस या पेट्रोलियम उत्पादों का उपयोग करने वाले पेट्रोरसायन संयंत्रों और पेट्रोलियम या प्राकृतिक गैस आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने वाली गतिविधियों में शामिल किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र या निजी क्षेत्र की इकाई पर लागू होगा।

भाषा रमण अजय

अजय