मुंबई, 19 मार्च (भाषा) कच्चे तेल के दाम में तेजी और वैश्विक स्तर पर कमजोरी के रुख से स्थानीय शेयर बाजारों में बृहस्पतिवार को तेज गिरावट आई और बीएसई सेंसेक्स 2,497 अंक का गोता लगा गया, जबकि एनएसई निफ्टी 775 अंक लुढ़क गया। इसके साथ बाजार में पिछले तीन दिन से जारी तेजी पर विराम लगा।
पश्चिम एशिया में तेल एवं गैस संयंत्रों पर हमलों के बाद कच्चे तेल के दाम में उछाल आया है। इससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है।
तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 2,496.89 अंक यानी 3.26 प्रतिशत का गोता लगाकर 74,207.24 अंक पर बंद हुआ। जून, 2024 के बाद सेंसेक्स में एक दिन में यह सबसे बड़ी गिरावट है। कारोबार के दौरान, यह 2,753.18 अंक टूटकर 73,950.95 अंक पर आ गया था।
पचास शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी भी 775.65 अंक यानी 3.26 प्रतिशत टूटकर 23,002.15 अंक पर बंद हुआ।
इससे पहले, पिछले तीन कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 2,140 अंक चढ़ा था जबकि निफ्टी में 626 अंक की तेजी रही थी।
सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में इटर्नल, बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, लार्सन एंड टुब्रो और बजाज फिनसर्व प्रमुख रूप से नुकसान में रहीं।
एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद बैंक का शेयर 5.13 प्रतिशत नीचे आ गया।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.75 प्रतिशत चढ़कर 114.8 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गयी। यह वृद्धि कतर में एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक गैस संयंत्र और कुवैत में दो तेल रिफाइनरियों पर ईरान के हमले के बाद हुई।
ईरान ने बृहस्पतिवार को अपने पड़ोसी देशों के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले तेज कर दिए। उसने लाल सागर स्थित सऊदी अरब की एक रिफाइनरी को निशाना बनाया और कतर के एलएनजी संयंत्रों और कुवैत की दो तेल रिफाइनरियों पर भी हमले किये। यह हमला इजराइल के उसके मुख्य प्राकृतिक गैस क्षेत्र पर हमले के जवाब में किया गया।
लाइवलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक और शोध विश्लेषक हरि प्रसाद के ने कहा, ‘‘भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। निफ्टी-50 ने एक ही सत्र में अपनी हाल की बढ़त खो दी। इसका कारण वैश्विक और घरेलू जोखिमों का प्रभाव एक साथ देखने को मिला।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह बिकवाली कई वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण हुई। इससे जोखिम की धारणा काफी हद तक बदल गयी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आपूर्ति में लगातार व्यवधान की आशंका बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमत 111 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है।’’
मझोली कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले बीएसई मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक में 3.34 प्रतिशत और छोटी कंपनियों के स्मॉलकैप में 2.77 प्रतिशत की गिरावट आई।
बीएसई में सूचीबद्ध शेयरों में से 3,192 शेयरों में गिरावट आई जबकि 1,051 बढ़त में रहे। वहीं 161 के भाव अपरिवर्तित रहे।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों के कारण तेल की कीमतों में फिर से उछाल आया और निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। इसके चलते घरेलू बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई और पिछले तीन दिन की बढ़त का लाभ चला गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने के बीच उच्च मुद्रास्फीति का संकेत दिया है।’’
एशिया के अन्य बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग काफी नुकसान में रहे।
यूरोप के प्रमुख बाजारों में भी दोपहर के कारोबार में भारी गिरावट का रुख था। अमेरिकी बाजार बुधवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए थे।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को 2,714.35 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 3,253.03 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
सेंसेक्स बुधवार को 633.29 अंक बढ़कर 76,704.13 अंक पर बंद हुआ था जबकि निफ्टी 196.65 अंक की तेजी के साथ 23,777.80 अंक पर रहा था।
भाषा रमण अजय
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