यूरोपीय संघ ने निर्यात लाभ छूट को स्थगित किया, भारतीय निर्यात होंगे प्रभावित

यूरोपीय संघ ने निर्यात लाभ छूट को स्थगित किया, भारतीय निर्यात होंगे प्रभावित

यूरोपीय संघ ने निर्यात लाभ छूट को स्थगित किया, भारतीय निर्यात होंगे प्रभावित
Modified Date: January 22, 2026 / 07:39 pm IST
Published Date: January 22, 2026 7:39 pm IST

नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) यूरोपीय संघ (ईयू) ने एक जनवरी, 2026 से भारत और दो अन्य देशों को सामान्यीकृत तरजीही व्यवस्था (जीएसपी) के तहत कुछ क्षेत्रों को दिए गए विशेष निर्यात लाभ को स्थगित कर दिया है। यह कदम 27 देशों वाले इस समूह को भारत से होने वाले निर्यात पर असर डालेगा।

यह घटना इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि भारत और यूरोपीय संघ 27 जनवरी को मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पर बातचीत पूरी होने की घोषणा कर सकते हैं।

यूरोपीय संघ के आधिकारिक जर्नल के मुताबिक, यूरोपीय आयोग ने सितंबर, 2025 में नियम जारी किए थे, जिनके तहत जीएसपी लाभ पाने वाले कुछ देशों- भारत, इंडोनेशिया और केन्या के लिए यह निर्यात छूट एक जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2028 तक लागू नहीं होगी।

इसका मतलब है कि अब तक 12 प्रतिशत शुल्क वाले किसी वस्त्र उत्पाद पर जीएसपी के तहत 9.6 प्रतिशत शुल्क ही देना पड़ता था, लेकिन अब पूरी 12 प्रतिशत दर लागू होगी।

यह छूट अब लगभग सभी प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों- खनिज, रसायन, प्लास्टिक, रबर, वस्त्र और परिधान, पत्थर एवं सिरेमिक, कीमती धातुएं, लोहा एवं इस्पात, मशीनरी, इलेक्ट्रिकल वस्तुएं और परिवहन उपकरण से हटा दी गई है। ये क्षेत्र भारत के यूरोपीय निर्यात का प्रमुख आधार हैं।

आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने एक बयान में कहा कि वस्त्र एवं प्लास्टिक जैसे क्षेत्रों को मिले जीएसपी लाभ हटाए जाने से भारतीय निर्यातकों को ‘महत्वपूर्ण चुनौती’ का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि 87 प्रतिशत निर्यात अब उच्च आयात शुल्क के अधीन होंगे। केवल कृषि और चमड़ा जैसे 13 प्रतिशत निर्यात ही अब जीएसपी लाभ के दायरे में रह जाएंगे।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘भारत-ईयू एफटीए संपन्न होने से जुड़़ी उम्मीदों के बीच जीएसपी छूट हटाए जाने और कार्बन कर प्रणाली सीबीएएम के तहत कर शुरू होने से भारतीय निर्यातकों को निकट भविष्य में उच्च शुल्क, बढ़ी हुई अनुपालन लागत और प्रतिस्पर्धा में कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।’

निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि लगभग 87 प्रतिशत भारतीय निर्यात अब ‘सर्वाधिक तरजीही देश’ (एमएफएन) के लिए लागू दर पर यूरोप में प्रवेश करेंगे, जिससे भारत की कीमत प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी।

सहाय ने कहा कि ऐसी स्थिति में यूरोपीय खरीदारों का रुख बांग्लादेश और वियतनाम जैसे शुल्क-मुक्त या कम शुल्क वाले आपूर्तिकर्ताओं की ओर मुड़ेगा।

भारत का 27 यूरोपीय देशों के समूह ईयू के साथ वस्तु व्यापार 2024-25 में 136.53 अरब डॉलर था, जिसमें 75.85 अरब डॉलर का निर्यात और 60.68 अरब डॉलर का आयात शामिल है।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण


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