निर्यातकों ने बजट में निर्यात बढ़ाने के लिए कर प्रोत्साहन, आयात शुल्क में सुधार की मांग की

निर्यातकों ने बजट में निर्यात बढ़ाने के लिए कर प्रोत्साहन, आयात शुल्क में सुधार की मांग की

निर्यातकों ने बजट में निर्यात बढ़ाने के लिए कर प्रोत्साहन, आयात शुल्क में सुधार की मांग की
Modified Date: January 22, 2026 / 07:50 pm IST
Published Date: January 22, 2026 7:50 pm IST

नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) देश के निर्यातकों ने आगामी बजट में कर प्रोत्साहन, आयात शुल्क को तर्कसंगत बनाने और वैश्विक बाजारों में ब्रांडिंग व मार्केटिंग के लिए वित्तीय सहायता की मांग की है। निर्यातकों का कहना है कि इन कदमों से वैश्विक स्तर पर भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

निर्यातकों ने सुझाव दिया है कि बजट में ‘उल्टे शुल्क ढांचे’ यानी तैयार उत्पादों के मुकाबले कच्चे माल पर अधिक शुल्क की समस्या का तत्काल समाधान किया जाना चाहिए। यह घरेलू विनिर्माण को प्रभावित करता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगी।

भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) ने निर्यात-उन्मुख उद्योगों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल पर आयात शुल्क को तर्कसंगत बनाने की सिफारिश की है, ताकि लागत को तैयार उत्पादों के शुल्क के अनुरूप लाया जा सके।

फियो ने उदाहरण देते हुए कहा कि सिंथेटिक धागे और फाइबर पर तैयार कपड़ों की तुलना में अधिक आयात शुल्क लगता है, जिससे कपड़ा उद्योग प्रभावित हो रहा है। इसी तरह, इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों (पीसीबी और कनेक्टर) और रसायनों व प्लास्टिक के कच्चे माल पर भी तैयार माल से ज्यादा कर है। चमड़ा और फुटवियर क्षेत्र में भी उपयोग होने वाले कच्चे माल पर ऊंचे शुल्क के कारण भारतीय विनिर्माताओं को नुकसान हो रहा है।

फियो के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने कहा, ‘कच्चे माल पर शुल्क को कम करने या सुधारने से उत्पादन लागत कम होगी, कार्यशील पूंजी का दबाव घटेगा और घरेलू विनिर्माण के साथ-साथ निर्यात की प्रतिस्पर्धी क्षमता भी मजबूत होगी।’

उन्होंने विदेशी पोत-परिवहन सुविधाओं पर भारत की भारी निर्भरता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे निर्यातकों को ऊंचे भाड़े और वैश्विक दरों में अस्थिरता की मार झेलनी पड़ती है।

इसके अलावा, फियो ने नई घरेलू विनिर्माण इकाइयों के लिए 15 प्रतिशत की रियायती कॉरपोरेट कर दर को कम से कम पांच साल और बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।

परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) ने बजट में वित्तीय प्रोत्साहन और ऋणों पर ब्याज सब्सिडी बढ़ाने की मांग की है, ताकि कपड़ा क्षेत्र अमेरिकी आयात शुल्क के झटके से उबर सके।

एईपीसी के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने कपड़ा मशीनरी पर जीएसटी दरों में कटौती और सूक्ष्म इकाइयों के लिए एक नयी तकनीकी उन्नयन योजना का सुझाव दिया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय परिधान क्षेत्र वर्तमान में बेहद चुनौतीपूर्ण माहौल का सामना कर रहा है। अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों में ऊंचे आयात शुल्क और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने व्यापार प्रवाह, लॉजिस्टिक और मांग को बुरी तरह प्रभावित किया है।

भाषा सुमित रमण

रमण


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