परिवार अल्पकालिक लाभ के बजाय अपने निवेश को दीर्घकालिक बचत योजनाओं में लगाएं : सीईए
परिवार अल्पकालिक लाभ के बजाय अपने निवेश को दीर्घकालिक बचत योजनाओं में लगाएं : सीईए
नयी दिल्ली, एक अक्टूबर (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने बृहस्पतिवार को परिवारों से अपनी निवेश के तरीके में बदलाव लाने का आह्रान किया। उन्होंने कहा कि परिवारों को अपने निवेश को अल्पकालिक लाभ के लिए छोटी अवधि के कारोबार के बजाय दीर्घावधि की बचत योजनाओं में लगाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वृद्धावस्था में वित्तीय सुरक्षा के लिए लंबी अवधि की पेंशन परिसंपत्तियों में निवेश महत्वपूर्ण है।
उन्होंने दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए पेंशन कोष विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए), वित्तीय मध्यस्थों और परिवारों के बीच साझेदारी की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि छोटी अवधि के कारोबार की तुलना में लंबे समय के लिए निवेश करना भले ही कम रोमांचक हो, लेकिन इससे सेवानिवृत्ति के बाद स्थायी वित्तीय सुरक्षा और मानसिक शांति मिलती है।
एनपीएस दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नागेश्वरन ने कहा कि पीएफआरडीए सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय देने वाली योजनाओं और भुगतान की व्यवस्था पर ध्यान दे रहा है।
उन्होंने कहा कि 60 वर्ष की आयु के बाद लोगों के पास अपने पेंशन कोष को नियमित आय में बदलने का विकल्प होना चाहिए। यह आय व्यक्ति के लिए जीवनभर जारी रहनी चाहिए और महंगाई बढ़ने के साथ इसमें भी बढ़ोतरी होनी चाहिए।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत सितंबर तक 18 लाख करोड़ रुपये का कोष था। इसमें करीब 47 प्रतिशत राशि सरकारी प्रतिभूतियों, 28 प्रतिशत शेयरों और 21 प्रतिशत कॉरपोरेट ऋण में निवेश की गई है।
कठोपनिषद में भगवान यम के संदेश का उल्लेख करते हुए नागेश्वरन ने कहा कि जीवन में व्यक्ति के सामने ‘श्रेय’ यानी स्थायी कल्याण और ‘प्रेय’ यानी क्षणिक सुख में से किसी एक को चुनने का अवसर आता है।
उन्होंने कहा कि पेंशन खाते में नियमित रूप से अंशदान करना ‘श्रेय’ को चुनने जैसा है, जबकि बहुत कम अवधि के लिए वायदा और विकल्प (एफएंडओ) में कारोबार करना क्षणिक लाभ को चुनने जैसा है।
नागेश्वरन ने कहा, “औसत परिवार और उसके मुखिया के लिए यह समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि अल्पकालिक कारोबार भले ही रोमांचक हो, लेकिन लंबी अवधि की परिसंपत्तियों में की गई बचत ही उस समय परिवार के स्वास्थ्य और कल्याण का आधार बनती है, जब व्यक्ति की कमाई का स्रोत बंद हो जाता है।’’
कार्यक्रम में वित्तीय सेवा सचिव संजय लोहिया ने कहा कि पेंशन कोष प्रबंधकों को अंशदाताओं के पेंशन कोष का प्रबंधन करते समय अपनी जिम्मेदारी को ध्यान में रखना चाहिए।
उन्होंने कहा, “ऋण कोष या म्यूचुअल फंड का प्रबंधन करना और पेंशन कोष का प्रबंधन करना अलग बात है। सामान्य निवेश में, चाहे वह म्यूचुअल फंड हो, शेयर बाजार हो या ऋण कोष, निवेश की अवधि आमतौर पर कुछ साल की होती है।”
लोहिया ने कहा, “मैं सभी पेंशन कोष प्रबंधकों से अनुरोध करना चाहता हूं कि वे इस बात को ध्यान में रखें कि इसे किसी अन्य निवेश योजना की तरह नहीं माना जाना चाहिए। इससे पीएफआरडीए और इन कोष की निगरानी करने वाले लोगों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि वे लोगों द्वारा उन पर जताए गए भरोसे को कायम रखें।”
सचिव ने कहा कि भारत का पेंशन कोष बढ़ना चाहिए और विदेशी पेंशन कोषों के साथ मिलकर बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए लंबे समय की पूंजी उपलब्ध कराने में मदद करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि धीरे-धीरे देश के अपने पेंशन कोष भी बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए ऐसी दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे।
भाषा योगेश अजय
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