पानीपत में पिता को दूध बेचने में मदद करने से लेकर ग्रीको-रोमन कुश्ती में एशियाड रजत तक नितेश
पानीपत में पिता को दूध बेचने में मदद करने से लेकर ग्रीको-रोमन कुश्ती में एशियाड रजत तक नितेश
नागोया, एक अक्टूबर (भाषा) एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाले ग्रीको-रोमन पहलवान नितेश सिवाच 15 साल की उम्र में हरियाणा के पानीपत में अपने पिता को दूध बेचने में मदद करने में व्यस्त रहते थे।
दो साल तक सुबह पांच बजे उठने और शाम पांच बजे घर लौटने के बाद नितेश ने अपने परिवार की अनुमति से कुश्ती का प्रशिक्षण शुरू किया।
उनकी मेहनत का फल दूर जापान में मिला। 23 वर्षीय नितेश को बृहस्पतिवार को 97 किग्रा फाइनल में जापान के यूरी नकाजातो से हारकर रजत पदक पर संतोष करना पड़ा। लेकिन इस पदक की चमक फिर भी बहुत खास है।
नितेश ने फाइनल के बाद कहा, ‘‘मेरे पिता दूधवाले हैं। जब मैं 15 साल का था, मेरे घुटने का ऑपरेशन हुआ था। मैंने अपने पिता के साथ दूधवाले के रूप में काम करना शुरू किया। मैं हर दिन दूध बेचता था। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं घर पर अकेला था इसलिए मेरे पिता ने मुझसे कहा ‘तुम घर पर अकेले क्या कर रहे हो? मेरे साथ (दूध बेचने) चलो’। मैं अपने पिता के साथ पानीपत जाता था। ’’
हरियाणा के पानीपत जिले के जगीसी गांव के रहने वाले नितेश ने 2017 से 2019 तक दूधवाले के रूप में काम किया। यह 12 घंटे का मुश्किल काम था और उन्होंने दो साल बाद इसे छोड़ दिया। फिर परिवार से कुश्ती में करियर फिर से शुरू करने की अनुमति मांगी जो घुटने के ऑपरेशन के कारण अस्थायी रूप से रुक गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा गांव पानीपत से 40 किमी दूर है। मैं सुबह पांच बजे उठता था और शाम पांच बजे घर लौटता था। मैंने दो साल तक दूध बेचा। मुझे एक दिन की भी छुट्टी नहीं मिलती थी इसलिए मैंने अपने परिवार से अनुरोध करने के बारे में सोचा। मैंने छह महीने मांगे और फिर मैंने दोबारा कुश्ती शुरू कर दी। ’’
इसके बाद उन्होंने खरखौदा के प्रताप स्कूल में प्रशिक्षण शुरू किया।
नितेश ने कहा, ‘‘मेरे शिक्षक ओम प्रकाश दहिया और संदीप ने मुझ पर बहुत ध्यान दिया। उन्होंने मुझे एक दिन विश्व चैंपियन बनने के लिए प्रेरित किया। मैं अभी तक विश्व चैंपियन नहीं बना हूं, लेकिन मुझे लगता है कि मैं एक दिन विश्व चैंपियन बनूंगा। ’’
2022 में नितेश ने अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। 2025 में उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता और इस साल रजत पदक हासिल किया।
भाषा नमिता पंत
पंत
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Web Title: पानीपत में पिता को दूध बेचने में मदद करने से लेकर ग्रीको-रोमन कुश्ती में एशियाड रजत तक नितेश

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