सहकारी बैंकों में सुधार के लिए कर्ज मंजूरी में तेजी, समय पर क्रियान्वयन जरूरी: सहकारिता सचिव

सहकारी बैंकों में सुधार के लिए कर्ज मंजूरी में तेजी, समय पर क्रियान्वयन जरूरी: सहकारिता सचिव

सहकारी बैंकों में सुधार के लिए कर्ज मंजूरी में तेजी, समय पर क्रियान्वयन जरूरी: सहकारिता सचिव
Modified Date: April 9, 2026 / 09:16 pm IST
Published Date: April 9, 2026 9:16 pm IST

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के सचिव आशीष कुमार भूटानी ने बृहस्पतिवार को राज्यों से ऋण मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि वर्तमान वित्तीय चक्र के भीतर ही धन का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आयोजित दो दिवसीय ‘सहकार से समृद्धि’ राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए भूटानी ने कहा कि सहकारी संस्थानों को मजबूत करने के लिए केवल इरादा काफी नहीं है, बल्कि इसके लिए समन्वित कार्रवाई और सख्त समय सीमा का होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, ‘‘सहकारी संस्थानों को सशक्त बनाने के लिए समन्वित कार्रवाई, समय पर निर्णय लेने और निरंतर प्रतिबद्धता की आवश्यकता है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां प्रगति उम्मीद से धीमी रही है।’’

एक सरकारी बयान के अनुसार, अक्टूबर 2024 से शुरू हुई राष्ट्रीय कार्यशालाओं की श्रृंखला का यह सातवां सम्मेलन था। इसमें मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए केंद्र, राज्यों और प्रमुख सहकारी संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

सम्मेलन के पहले दिन प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) और कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों (एआरडीबी) के कम्प्यूटरीकरण की समीक्षा की गई। इस दौरान गुणवत्ता की निगरानी, प्रगति की समीक्षा और इन्हें एग्री स्टैक (कृषि से संबंधित मुकम्मल प्रौद्योगिकी ढांचा), केसीसी तथा उर्वरक प्रणालियों जैसे राष्ट्रीय मंचों के साथ जोड़ने पर चर्चा हुई।

भूटानी ने पिछले छह से नौ महीनों में पीएसीएस के कम्प्यूटरीकरण की दिशा में हुई प्रगति की सराहना की, लेकिन आगाह किया कि मार्च 2027 में योजना की अवधि समाप्त होने के बाद भी इस प्रगति को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने जो गति हासिल की है, उसे एक स्थायी प्रणाली में बदलना होगा। राज्यों को कम्प्यूटरीकरण के दीर्घकालिक महत्व को समझते हुए इसे योजना की अवधि के बाद भी आगे बढ़ाना चाहिए।’’

एक अन्य सत्र में सहकारिता क्षेत्र में ‘विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना’ की समीक्षा की गई। इसमें स्थान चयन, भंडारण क्षमता की योजना, वित्तपोषण, ई-एनडब्ल्यूआर आधारित प्रणाली और भंडारण परिवेश में सहकारी समितियों की भागीदारी बढ़ाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

सम्मेलन में निष्क्रिय पीएसीएस को पुनर्जीवित करने और उन्हें बहु-सेवा केंद्रों के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि वे बीज वितरण, उर्वरक आपूर्ति, साझा सेवा केंद्र (सीएससी), जन औषधि केंद्र और डिजिटल वॉलेट जैसी सुविधाएं प्रदान कर सकें।

इसके अलावा जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) के माध्यम से ऋण प्रवाह, साइबर सुरक्षा, आधार सीडिंग, ‘डोरस्टेप बैंकिंग’ और तकनीक अपनाने पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य पैक्स को जमीनी स्तर पर एक मजबूत सेवा वितरण संस्थान बनाना है।

भूटानी ने स्पष्ट किया कि अब केवल चर्चा का समय बीत चुका है।

उन्होंने कहा, ‘‘अब इन पहलों को जिला स्तर पर स्पष्ट और समयबद्ध क्रियान्वयन योजनाओं के साथ धरातल पर उतारने का समय आ गया है।’’

सचिव ने सभी हितधारकों से प्रदर्शन के अंतर को पाटने और लक्ष्यों को जमीन पर ठोस परिणामों में बदलने का आह्वान किया।

भाषा राजेश सुमित रमण

रमण


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