अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक आसानी से नहीं मिलते, जैविक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत : शिवराज
अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक आसानी से नहीं मिलते, जैविक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत : शिवराज
भुवनेश्वर, 19 मई (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार से उर्वरक खरीदने में आने वाली चुनौतियों को स्वीकार किया तथा राज्यों और किसानों से जैविक खेती को एक विकल्प के तौर पर तेजी से अपनाने की अपील की।
भुवनेश्वर में पूर्वी क्षेत्र कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए, चौहान ने कहा कि केंद्र वैश्विक आपूर्ति की दिक्कतों के बावजूद किसानों के लिए उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यह मानने में कोई झिझक नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक आसानी से नहीं मिलते। भारत सरकार हमारे किसानों के लिए जहां भी उपलब्ध हैं, वहां से उर्वरकों को खरीदने की पूरी कोशिश कर रही है।’’
उन्होंने मौजूदा आपूर्ति की कमी के दौरान सब्सिडी वाले उर्वरक के गलत और बेजा इस्तेमाल को रोकने की जरूरत पर जोर दिया।
चौहान ने कहा, ‘‘हमें यह पक्का करना होगा कि सब्सिडी वाले उर्वरक किसी दूसरे क्षेत्र में न जाएं। साथ ही, नकली और खराब गुणवत्ता वाले उर्वरक, जो फसलों और किसानों पर बुरा असर डालते हैं, उन्हें भी रोकना होगा। जहां भी ऐसी गड़बड़ियां पाई जाएं, राज्यों को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।’’
उर्वरक सब्सिडी के लिए 41,000 करोड़ रुपये मंजूर करने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के हालिया फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र किसानों को समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने राज्यों और किसानों से आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देने की भी अपील की।
उन्होंने कहा, ‘‘हर किसान को अपनी जमीन के कम से कम एक हिस्से पर जैविक खेती शुरू करनी चाहिए।’’
मंत्री ने कहा कि केंद्र अच्छी गुणवत्ता के कीटनाशक और बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत करने के मकसद से दो नए विधेयक लाने की योजना बना रहा है।
इस साल खेती पर अल नीनो के संभावित असर पर चिंता जताते हुए चौहान ने कहा कि अनुमान बताते हैं कि फसल के मौसम के बीच में बारिश कम होने की संभावना है।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे में किसानों को ऐसी फसलें उगाने की सलाह दी जानी चाहिए जिन पर बारिश के उतार-चढ़ाव का कम असर हो।’’
चौहान ने कहा कि किसानों में खेती की आधुनिक प्रौद्योगिकी और सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक जून से 15 जून तक ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा।
सम्मेलन में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री राम नाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी, ओडिशा के उप-मुख्यमंत्री के वी सिंह देव और बिहार, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कृषि मंत्री मौजूद थे।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय

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