वित्तीय खुफिया इकाई ने 15 क्रिप्टो सेवा प्रदाताओं को नोटिस दिया, वेबसाइट पते को हटाने को कहा

वित्तीय खुफिया इकाई ने 15 क्रिप्टो सेवा प्रदाताओं को नोटिस दिया, वेबसाइट पते को हटाने को कहा

वित्तीय खुफिया इकाई ने 15 क्रिप्टो सेवा प्रदाताओं को नोटिस दिया, वेबसाइट पते को हटाने को कहा
Modified Date: September 9, 2026 / 03:03 pm IST
Published Date: September 9, 2026 3:03 pm IST

नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू-भारत) ने धन शोधन रोधक कानून का पालन नहीं करने पर क्रिप्टो सेवा प्रदाताओं को नोटिस जारी किया है। साथ ही उनसे अपने ऐप तथा वेबसाइट पते को लोगों की पहुंच से हटाने को कहा है।

वित्त मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि भारत में काम करने वाले ‘वर्चुअल डिजिटल’ परिसंपत्ति यानी क्रिप्टो सेवा प्रदाता यदि डिजिटल परिसंपत्तियों और सरकारी मुद्रा की खरीद-बिक्री या डिजिटल परिसंपत्तियों के हस्तांतरण जैसी सेवाएं देते हैं, तो उनके लिए वित्तीय खुफिया इकाई-भारत में सूचना देने वाली संस्था के रूप में पंजीकरण कराना और धन शोधन रोधक कानून का पालन करना जरूरी है। यह नियम देश के भीतर या विदेश में रहकर भारत में परिचालन करने वाले सभी इकाइयों पर लागू है।

मंत्रालय ने कहा कि इकाई की यह जिम्मेदारी भारत में भौतिक रूप से मौजूदगी पर नहीं, बल्कि उसकी गतिविधियों पर आधारित हैं।

गैर-अनुपालन करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई के तहत वित्तीय खुफिया इकाई-भारत ने धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत 15 सेवा प्रदाताओं को नोटिस जारी किए हैं। इनमें वीक्स इंटरनेशनल एक्सचेंज, बीएलएफ ग्लोबल, बिटूनिक्स एलएलसी, डिजीफिनेक्स लि. और फिनसेवन सीजेड शामिल हैं।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘वित्तीय खुफिया इकाई-भारत के निदेशक ने इन इकाइयों को अपने ऐप और वेबसाइट पतों को लोगों की पहुंच से हटाने का नोटिस भी दिया है। इन इकाइयों को भारत में धन शोधन निवारण कानून के संबंधित प्रावधानों का पालन किए बिना अवैध रूप से काम करते पाया गया है।’’

उल्लेखनीय है कि वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्ति सेवा प्रदाताओं को मार्च, 2023 में धन शोधन रोधक कानून के तहत धन शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने वाली व्यवस्था के दायरे में लाया गया था।

मंत्रालय ने निवेशकों को सावधान करते हुए कहा कि क्रिप्टो उत्पाद और एनएफटी (ब्लॉकचेन आधारित डिजिल परिसंपत्ति) नियमन के दायरे में नहीं हैं और इनमें काफी जोखिम हो सकता है। ऐसे लेनदेन में नुकसान होने पर उसके लिए नियामकीय राहत मिलना जरूरी नहीं है।

भाषा रमण अजय

अजय


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