उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े जोखिमों से निपटने को ‘फिनटेक’ उद्योग को निवेश बढ़ाना चाहिए : अग्रवाल
उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े जोखिमों से निपटने को ‘फिनटेक’ उद्योग को निवेश बढ़ाना चाहिए : अग्रवाल
मुंबई, 10 सितंबर (भाषा) वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) के उपाध्यक्ष विवेक अग्रवाल ने बृहस्पतिवार को वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) उद्योग से कृत्रिम मेधा (एआई), ऑनलाइन धोखाधड़ी के ठिकानों और अन्य प्रौद्योगिकियों से उभरते खतरों से निपटने के लिए निवेश बढ़ाने को कहा। उन्होंने कहा कि ये चुनौतियां भारत की विकास यात्रा के लिए बड़ा जोखिम हैं।
अग्रवाल ने कहा कि उभरती प्रौद्योगिकियां, वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्तियां और क्रिप्टोकरेंसी एफएटीएफ के लिए बड़ी चुनौती हैं। एफएटीएफ पेरिस स्थित एक संस्था है, जो धन शोधन, आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए वैश्विक मानक तय करती है।
वैश्विक फिनटेक सम्मेलन 2026 में अग्रवाल ने कहा, ‘‘एआई के क्षेत्र में हो रहे प्रौद्योगिकी विकास का इस्तेमाल अपराध करने के लिए किया जा सकता है। इसलिए हमें उसका मुकाबला करना होगा और संभवत: उसी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल अपराध करने वालों की पहचान करने तथा उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए करना होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह बिल्ली और चूहे का खेल है, जिसमें हमें लगातार सतर्क रहना होगा।’’
यह पूछे जाने पर कि उद्योग किस जोखिम को कम करके आंक रहा है, उन्होंने कहा कि उद्योग को तैयार रहना होगा और यह समझना होगा कि जोखिम कृत्रिम मेधा (एआई), धोखाधड़ी या प्रौद्योगिकी से उभरने वाले अन्य खतरों से आ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग भी एक जोखिम हो सकती है, जो एन्क्रिप्शन और क्रिप्टोग्राफी को तोड़ सकती है।
अग्रवाल ने कहा कि इन सभी जोखिमों का समय रहते उचित तरीके से प्रबंधन करना होगा और इसके लिए निवेश भी करना होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे विचार से बदलाव के प्रबंधन और उभरते खतरों का मुकाबला करने के लिए निवेश करने की प्रवृत्ति हमारे लिए चुनौती होगी।’’
उन्होंने बताया कि उद्योग को उभरती प्रौद्योगिकियों से पैदा होने वाले जोखिमों को समझना चाहिए।
अग्रवाल ने कहा कि भारतीय वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जोखिमों की पर्याप्त समझ अभी विकसित नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र बहुत तेजी से बढ़ रहा है और ऐसे में जोखिमों की समझ उतनी गहरी नहीं हो सकती। साथ ही, उद्योग में आवश्यक निवेश, समय और संसाधनों की जरूरत भी फिलहाल पूरी नहीं हो रही है।
भाषा योगेश अजय
अजय

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