नयी दिल्ली, 22 फरवरी (भाषा) देश की रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली कंपनियों (एफएमसीजी) का मानना है कि अगले वित्त वर्ष में उनकी वृद्धि मुख्य रूप से बिक्री की मात्रा पर आधारित होगी।
कंपनियों का कहना है कि महंगाई घटने और कच्चे माल की कीमतें स्थिर रहने से उनके मुनाफे पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में इन कंपनियों ने मध्यम से उच्च स्तर की मात्रा वृद्धि दर्ज की।
हाल की बैठकों में उद्योग के दिग्गजों ने कहा कि कई महीनों की अस्थिरता के बाद कारोबार का माहौल अब बेहतर हो रहा है। आवश्यक कच्चे माल जैसे खाद्य तेल, गेहूं, नारियल और रसायनों की कीमतें कम हुई हैं। साथ ही जीएसटी दरों में सुधार, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि और अच्छी फसल के कारण मांग में धीरे-धीरे सुधार होने की उम्मीद है।
कई कंपनियों ने पहले ही चालू वित्त वर्ष में मामूली मूल्य वृद्धि की है और अब उनका मानना है कि वृद्धि कीमतों के बजाय बिक्री की मात्रा से होगी।
डाबर इंडिया के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) मोहित मल्होत्रा ने कहा, ‘‘चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में महंगाई काफी बढ़ी थी। अब महंगाई धीरे-धीरे कम हो रही है। नारियल तेल, साबुन, रसायन और वनस्पति तेल की कीमतें घट रही हैं। इसलिए अगले वित्त वर्ष वृद्धि मुख्य रूप से बिक्री की मात्रा पर आधारित होगी, कीमतों पर नहीं।’
हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि पहले की गई कुछ मूल्य वृद्धि का असर अभी भी रहेगा।
मैरिको के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सौगत गुप्ता ने कहा, ‘महंगाई में कमी, जीएसटी दरों में सुधार, एमएसपी बढ़ना और अच्छी फसल ने उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता बढ़ाई है। ये सभी कारक आने वाले तिमाहियों में शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में मांग बढ़ने में मदद करेंगे।’
ब्रिटानिया के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रक्षित हर्गेव ने कहा कि उनकी कंपनी के लिए कच्चे माल की कीमतें स्थिर हैं और मुनाफा अच्छा बना हुआ है। विशेष रूप से गेहूं का आटा तीसरी तिमाही में थोड़ा सस्ता हुआ है।
भाषा अजय योगेश
अजय