(क्वींसलैंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की फेलिसिटी डीन द्वारा)
ब्रिस्बेन, 22 फरवरी (द कन्वरसेशन) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका सभी देशों से आयात पर शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर देगा, क्योंकि शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय के एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद से इसका असर जारी है।
ट्रंप ने पिछले साल आपातकालीन शक्तियों के अधिनियम के तहत व्यापक ‘‘पारस्परिक शुल्क’’ लगाए थे, लेकिन अदालत ने फैसला सुनाया कि यह कानून उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं देता।
शुक्रवार को आए फैसले के बाद ट्रंप ने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की आलोचना की थी। ट्रंप ने कहा था कि वह अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के उन न्यायाधीशों को लेकर “बेहद शर्मिंदा” हैं जिन्होंने शुल्क के संबंध में “अत्यंत निराशाजनक” फैसला दिया है।
ट्रंप ने हालांकि स्वीकार किया था कि उन्होंने आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करके ‘‘मामलों को सरल बनाने’’ की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि उनके पास अन्य विकल्प भी हैं, लेकिन उन विकल्पों में अधिक समय लगेगा। उनके भाषण का यह हिस्सा बिल्कुल सटीक था।
उनके ऐतिहासिक आर्थिक एजेंडे के लिए समय तेजी से गुजर रहा है और अरबों डॉलर के रिफंड का सवाल सामने आ रहा है, ऐसे में ट्रंप आगे क्या कर सकते हैं? ऑस्ट्रेलिया और दुनिया दोनों के लिए अब आगे क्या हो सकता है, यह यहां बताया गया है।
15 प्रतिशत की नयी दर, एक अलग कानून का इस्तेमाल करते हुए फैसले के तुरंत बाद लागू किए गए 10 प्रतिशत के वैश्विक शुल्क में वृद्धि है, और इससे कुछ ऑस्ट्रेलियाई निर्यात प्रभावित होंगे।
कानून के इस खंड का कभी इस्तेमाल नहीं किया गया है। हालांकि, ऐसा प्रतीत होता है कि यह राष्ट्रपति को 15 प्रतिशत तक का शुल्क लगाने की अनुमति देता है और वह भी अधिकतम 150 दिन की अवधि के लिए।
लेकिन ट्रंप ने कहा कि पांच महीने की इस अवधि के दौरान, उनका प्रशासन एक और कानून, 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के इस्तेमाल की पड़ताल करेगा।
यह खंड राष्ट्रपति को उन विदेशी देशों पर शुल्क लगाने की अनुमति देता है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के तहत अमेरिकी अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, या जो अमेरिकी वाणिज्य को ‘‘अनुचित’’, ‘‘अतार्किक’’ या ‘‘भेदभावपूर्ण’’ तरीकों से बाधित या प्रतिबंधित करते हैं। हालांकि, इसके लिए कुछ चरणों का पालन करना आवश्यक है।
इस कानून को लागू करने की प्रक्रिया विस्तृत है और इसे पलटा नहीं जा सकता। कम से कम, इसके लिए उन देशों से परामर्श करना आवश्यक है जिनके माल पर ये शुल्क लगाए जाएंगे।
धारा 301 का इस्तेमाल पहले भी 2018 में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि द्वारा की गई जांच के बाद चीन पर टैरिफ लगाने के लिए किया गया था।
दूसरा विकल्प
राष्ट्रपति के लिए कांग्रेस को दरकिनार करने का एक और तरीका एक अलग कानून का एक विशिष्ट खंड है, व्यापार विस्तार अधिनियम 1962 की धारा 232, जो अर्थव्यवस्था के एक विशेष क्षेत्र पर लागू होती है।
यह वही शक्ति है जिसका इस्तेमाल 2018 में पहले ट्रंप प्रशासन के दौरान इस्पात और एल्युमीनियम पर शुल्क लगाने के लिए किया गया था।
हालांकि, इसका इस्तेमाल सभी विदेशी आयातों पर व्यापक शुल्क लगाने के लिए नहीं किया जा सकता। यह प्रावधान आमतौर पर उत्पाद-विशिष्ट होता है और इसके लिए राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे की जांच-पड़ताल आवश्यक है।
इस्पात और एल्युमीनियम पर शुल्क लगाने के लिए इसके इस्तेमाल को विश्व व्यापार संगठन में कई व्यापारिक साझेदारों द्वारा चुनौती दी गई है।
हालांकि इस उल्लंघन के बावजूद, ट्रंप ने यह सुझाव दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून से बंधे नहीं हैं।
शुक्रवार को आए उच्चतम न्यायालय के फैसले का मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) के तहत लागू किए गए सभी शुल्क गैरकानूनी रूप से लिए गए थे।
यदि सभी एकत्र शुल्क वापस कर दिए जाते हैं, तो अनुमान है कि कुल पुनर्भुगतान लगभग 175 अरब अमेरिकी डॉलर (247 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर) तक पहुंच सकता है।
उच्चतम न्यायालय के फैसले में अवैध रूप से वसूले गए शुल्कों की वापसी की प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्टता नहीं थी।
ऑस्ट्रेलिया की पिछली 10 प्रतिशत दर कई अन्य देशों की तुलना में काफी कम थी, लेकिन अब 15 प्रतिशत पर आकर स्थिति बराबर हो गई है – कम से कम अगले 150 दिन के लिए।
ऑस्ट्रेलियाई निर्यातक इन शुल्कों का भुगतान सीधे तौर पर स्वयं नहीं करते हैं, लेकिन उन पर लागत का कुछ हिस्सा वहन करने का दबाव पड़ सकता है, और इससे अमेरिकी बाजार में उनके आयात की प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो जाती है।
हालांकि सभी ऑस्ट्रेलियाई निर्यातकों की स्थिति एक जैसी नहीं है। व्हाइट हाउस द्वारा जारी घोषणा में कुछ अपवादों का उल्लेख किया गया है, जिनमें बीफ, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा उत्पाद और दवाइयां शामिल हैं।
ट्रंप ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि अमेरिका और दुनिया में ‘‘काफी हद तक निश्चितता’’ लौट आई है। सच्चाई यह है कि अनिश्चितता अभी खत्म नहीं हुई है।
(द कन्वरसेशन)
देवेंद्र नेत्रपाल
नेत्रपाल