विदेशी निवेश से वित्त वर्ष के अंत तक रुपया 94 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है: अनिंद्य बनर्जी

विदेशी निवेश से वित्त वर्ष के अंत तक रुपया 94 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है: अनिंद्य बनर्जी

विदेशी निवेश से वित्त वर्ष के अंत तक रुपया 94 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है:  अनिंद्य बनर्जी
Modified Date: August 12, 2026 / 01:55 pm IST
Published Date: August 12, 2026 1:55 pm IST

नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) कोटक सिक्योरिटीज में जिंस एवं मुद्रा शोध के प्रमुख अनिंद्य बनर्जी ने कहा कि फिलहाल 95.40 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा भारतीय रुपया कच्चे तेल की औसत कीमत 80 डॉलर के निचले से मध्य स्तर पर आने तथा विदेशी पूंजी के प्रवाह और विदेशी मुद्रा भंडार के स्थिर रहने पर 94 के स्तर तक मजबूत हो सकता है।

उन्होंने कहा कि सामान्य अनुमान के तौर पर ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत में प्रत्येक 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत की सालाना आयात लागत में करीब 13-15 अरब डॉलर जुड़ते हैं। इसका चालू खाते पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के करीब 0.3-0.4 प्रतिशत के बराबर असर पड़ता है। इसलिए ब्रेंट के 100 डॉलर से नीचे रहने पर बाहरी खाता प्रबंधन योग्य स्थिति में रहता है।

अनिंद्य बनर्जी ने कहा कि इस साल की शुरुआत में जब कच्चे तेल की कीमतें 120-126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, तब ऊर्जा कूटनीति के प्रभावी इस्तेमाल, विविध स्रोतों से खरीद और पुराने आपूर्तिकर्ताओं के साथ संबंधों ने महंगाई को नियंत्रित रखने और लोगों पर इसका असर कम करने में मदद की।

बनर्जी ने कहा, ‘‘हम जिन कारकों पर नजर रखेंगे, उनमें पश्चिम एशिया में नए सिरे से तनाव बढ़ने पर ब्रेंट का 110 डॉलर से ऊपर जाना, अमेरिका में ब्याज दरों का और सख्त होना, विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव और सितंबर में विशेष जमा सुविधा की अवधि समाप्त होने के बाद मौसमी बदलाव शामिल हैं। भारत के पास मौजूद सुरक्षा उपायों को देखते हुए इनमें से प्रत्येक स्थिति को संभाला जा सकता है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर से नीचे रहने पर मुद्रा मजबूत बनी रहेगी।’’

कोटक सिक्योरिटीज के अनुसार, डॉलर के मुकाबले रुपया चालू वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक धीरे-धीरे मजबूत होकर 94 तक पहुंच सकता है। यह इस अनुमान पर आधारित है कि ब्रेंट की औसत कीमत 80 डॉलर के मध्य स्तर या इससे कम रहेगी, ओपेक+ आपूर्ति बहाल करेगा, विशेष जमा सुविधा के तहत धन का प्रवाह जारी रहेगा और विदेशी निवेश का रुख सकारात्मक बना रहेगा।

हालांकि, पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और अमेरिका में ब्याज दरें और सख्त हो सकती हैं। ऐसी स्थिति पर बनर्जी ने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि रुपया 96-97 के दायरे में पहुंच सकता है जो इस साल पहले ही देखे जा चुके स्तरों के भीतर है।’’

रुपया फिलहाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 95.40 के स्तर पर है।

बनर्जी के अनुसार, विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफसीएनआर-बी) जमा के तहत आए धन ने व्यापार घाटे के दबाव को कम करने में मदद की है और इस साल यह बाहरी क्षेत्र को समर्थन देने वाले सबसे महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक बन गया है।

उन्होंने कहा कि मुद्रा अदला-बदली सुविधा के तहत कुल प्रवाह 31 जुलाई तक 40.82 अरब डॉलर पहुंच गया, जो एक पखवाड़े में करीब दोगुना हो गया है। इसमें एफसीएनआर(बी) जमा 36.7 अरब डॉलर यानी करीब 90 प्रतिशत है।

बनर्जी ने कहा, ‘‘पिछले समूचे वित्त वर्ष में एफसीएनआर(बी) के तहत आए एक अरब डॉलर से कम के प्रवाह और मासिक व्यापार घाटे के आकार की तुलना में यह एक बड़ा सुरक्षा कवच है।’’

इसके अलावा, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार बढ़ रहा है और फरवरी में दर्ज 728 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ रहा है। यह दुनिया के सबसे बड़े सुरक्षा भंडारों में से एक है और करीब 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को बताया था कि 31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 10.512 अरब डॉलर बढ़कर 692.866 अरब डॉलर हो गया।

इस साल 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू हुआ, जिससे कई हफ्तों तक भंडार में गिरावट आई और रुपये पर दबाव बढ़ने के बीच आरबीआई को डॉलर की बिक्री के जरिये विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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