विदेशों में भाव नरम पड़ने से विदेशी तेलों में मांग बढ़ी, सरसों में स्टाक तंगी से मजबूती बरकरार

विदेशों में भाव नरम पड़ने से विदेशी तेलों में मांग बढ़ी, सरसों में स्टाक तंगी से मजबूती बरकरार

विदेशों में भाव नरम पड़ने से विदेशी तेलों में मांग बढ़ी, सरसों में स्टाक तंगी से मजबूती बरकरार
Modified Date: November 29, 2022 / 08:57 pm IST
Published Date: May 17, 2021 12:07 pm IST

नयी दिल्ली, 17 मई (भाषा) विदेशों में खाद्य तेलों के भाव नरम पड़ने से स्थानीय तेल तिलहन बाजार में पामोलिन और दूसरे विदेशी तेलों की मांग बढ़ गई। हालांकि, सरसों में मांग जारी रहने और स्टॉक तंगी को देखते हुये मजबूती बरकरार रही। वहीं गुजरात में गर्मियों की मूंगफली फसल आने से इसमें नरमी का रुख रहा।

बाजार सूत्रों का कहना है कि अमेरिका के शिकागो और मलेशिया में क्रमश: सोयाबीन डीगम और पॉम तेल का भाव नरम थे। विदेशों में भाव नरम पड़ने से तथा स्थ्ज्ञानीय बाजार में इनकी मांग निकलने से इनमें हल्की मजबूती का रुख रहा।

कच्चा पॉम तेल एक्स कांडला 10 रुपये बढ़कर 12,670 रुपये और दिल्ली में रिफाइंड पामोलिन 50 रुपये बढ़कर 14,600 रुपये क्विंटल बोला गया। वहीं दूसरी तरफ सोयाबीन डीगम कांडला 80 रुपये घटकर 14,420 रुपये और सोयाबीन मिल डिलीवरी दिल्ली का भाव 16,000 रुपये क्विंटल पर टिका रहा। मांग निकलने से बिनौला मिल डिलीवरी हरियाणा 14,800 रुपये क्विंटल पर टिका रहा।

वहीं सरसों की यदि बात की जाये तो स्टॉक स्थिति को देखते हुये भाव 25 रुपये बढ़कर 7,575- 7,625 रुपये क्विंटल हो गया। सरसों तेल मिलडिलीवरी दादरी भी 25 रुपये बढ़कर 15,150 रुपये क्विंटल हो गया। जानकारों के मुताबिक सरसों तेल में इस समय निखालिस सरसों का ही इस्तेमाल हो रहा है, ऊपर से गुजरात तथा कुछ अन्य राज्यों में सरसों का रिफाइंड तेल भी बनाया जा रहा है जिससे सरसों की खपत तेजी से बढ़ रही है। फसल आने के बाद पिछले दो- तीन महीने में ही 35 से 40 प्रतिशत सरसों की पिराई हो चुकी है। ऐसे में सरकार को स्थिति को संज्ञान में लेकर सरसों रिफाइंड को तो कम से कम बंद करा ही देना चाहिये। इस बार पिछले साल का सरसों स्टॉक नाममात्र के लिये भी नहीं था। जबकि नया उत्पादन करीब 90 लाख टन रहने का अनुमान बताया गया। 35 प्रतिशत माल निकल चुका है शेष अभी पूरा साल पड़ा हुआ है। बाजार में संतुलन और ग्राहकों के हित को ध्यान में रखते हुये सरकार को कदम उठाना चाहिये।

गुजरात में गर्मियों की मूंगफली की फसल आ रही है इससे मूंगफली में 25 रुपये की नरमी रही। वहीं तेल मूंगफली 100 रुपये घटकर 15,400 रुपये क्विंटल रह गया।

बाजार के जानकार मानते हैं कि किसानों और घरेलू तेल उद्योग के हित में सरकार को तेल- तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिये हर संभव कदम उठाना चाहिये।

बाकी सभी तेल तिलहनों के भाव पूर्ववत बंद हुए।

बाजार में थोक भाव इस प्रकार रहे- (भाव- रुपये प्रति क्विंटल)

सरसों तिलहन – 7,575 – 7,625 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये।

मूंगफली दाना – 6,270 – 6,315 रुपये।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात)- 15,400 रुपये।

मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,465 – 2,515 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 15,150 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,395 -2,445 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,495 – 2,595 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 16,000 – 18,500 रुपये।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 16,000 रुपये।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 15,750 रुपये।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 14,420 रुपये।

सीपीओ एक्स-कांडला- 12,670 रुपये।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 14,800 रुपये।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 14,600 रुपये।

पामोलिन एक्स- कांडला- 13,600 (बिना जीएसटी के)

सोयाबीन दाना 7,900 – 7,950, सोयाबीन लूज 7,750 – 7,800 रुपये

मक्का खल 3,800 रुपये

भाषा राजेश महाबीर मनोहर

मनोहर


लेखक के बारे में