पश्चिम एशिया संकट के बीच पिछले चार कारोबारी सत्रों में एफपीआई ने 21,000 करोड़ रुपये निकाले

पश्चिम एशिया संकट के बीच पिछले चार कारोबारी सत्रों में एफपीआई ने 21,000 करोड़ रुपये निकाले

पश्चिम एशिया संकट के बीच पिछले चार कारोबारी सत्रों में एफपीआई ने 21,000 करोड़ रुपये निकाले
Modified Date: March 8, 2026 / 11:59 am IST
Published Date: March 8, 2026 11:59 am IST

नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) विदेशी निवेशकों ने पश्चिम एशिया संकट के बीच पिछले चार कारोबारी सत्रों के दौरान भारतीय इक्विटी से 21,000 करोड़ रुपये निकाले हैं।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा फरवरी में भारतीय इक्विटी में 22,615 करोड़ रुपये के निवेश के बाद यह ताजा बिकवाली हुई है। फरवरी का निवेश पिछले 17 महीनों में सबसे अधिक मासिक लिवाली थी।

इससे पहले एफपीआई लगातार तीन महीनों तक शुद्ध विक्रेता रहे थे। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार उन्होंने जनवरी में 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3,765 करोड़ रुपये निकाले थे। ताजा निकासी 2-6 मार्च के दौरान हुई, जब एफपीआई ने ‘कैश मार्केट’ में लगभग 21,000 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे। उल्लेखनीय है कि तीन मार्च को होली के उपलक्ष्य में बाजार बंद थे।

बाजार विशेषज्ञों ने इस निकासी का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को बताया है। एंजेल वन के वरिष्ठ बुनियादी विश्लेषक वकारजावेद खान ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के डर ने ब्रेंट क्रूड की कीमतों को 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया, जिससे वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की धारणा पैदा हुई।

इसके अलावा रुपया 92 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे चला गया, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में बढ़ोतरी हुई, जिससे बाजार की धारणा कमजोर हुई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर अनिश्चितता, बाजार में हालिया सुधार और कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि ने एफपीआई की बिकवाली में योगदान दिया है।

भाषा पाण्डेय

पाण्डेय


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