भारत के खेतों से जर्मनी के मेले में: यूरोप में अवसर तलाश रहे जैविक उत्पाद निर्यातक

भारत के खेतों से जर्मनी के मेले में: यूरोप में अवसर तलाश रहे जैविक उत्पाद निर्यातक

भारत के खेतों से जर्मनी के मेले में: यूरोप में अवसर तलाश रहे जैविक उत्पाद निर्यातक
Modified Date: February 10, 2026 / 12:46 pm IST
Published Date: February 10, 2026 12:46 pm IST

न्यूर्नबर्ग (जर्मनी), 10 फरवरी (भाषा) भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता पूरा होने की घोषणा के बाद असम, मेघालय और केरल समेत देश के 20 से अधिक राज्यों के प्रदर्शक जर्मनी के न्यूर्नबर्ग शहर में आयोजित विश्व के सबसे बड़े ‘जैविक खाद्य व्यापार मेले’ में अपने उत्पाद प्रदर्शित कर रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

इस पहल से यूरोपीय देशों में भारत के जैविक उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

भारत और यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी को व्यापक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी, जिसके इस वर्ष लागू होने की संभावना है। इससे 27 देशों वाले यूरोपीय समूह में भारतीय निर्यातकों के लिए बड़े अवसर खुलेंगे।

इस चार दिन तक चलने वाले मेले में भारत को “वर्ष का देश” घोषित किया गया है। इस मेले की शुरुआत 10 फरवरी से हुई।

वाणिज्य मंत्रालय की इकाई कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के अनुसार, मेले में भारत की भागीदारी देश से बढ़ते जैविक निर्यात, वैश्विक मांग में वृद्धि और निर्यातकों तथा किसान उत्पादक संगठनों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।

दिल्ली, गुजरात, मेघालय, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड सहित 20 से अधिक राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से प्रदर्शक यहां पहुंचे हैं।

करीब 67 सह-प्रदर्शक चावल, तिलहन, जड़ी-बूटियां, मसाले, दालें, काजू, अदरक, हल्दी, बड़ी इलायची, दालचीनी, आम का गूदा और सुगंधित तेल जैसे उत्पाद प्रदर्शित कर रहे हैं। इनमें निर्यातक, किसान उत्पादक संगठन, सहकारी संस्थाएं, जैविक परीक्षण प्रयोगशालाएं, राज्य सरकारी संस्थाएं और जिंस बोर्ड शामिल हैं।

इसमें कहा गया, ‘‘ तेजी से बढ़ते जैविक बाजार को देखते हुए भारत, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले और टिकाऊ तरीके से उत्पादित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।’’

अनुमानों के मुताबिक, भारत से जैविक उत्पादों का निर्यात फिलहाल 5,000–6,000 करोड़ रुपये का है, जो अगले तीन वर्ष में बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वैश्विक स्तर पर इन उत्पादों की मांग लगभग एक लाख करोड़ रुपये की है जिसके आने वाले वर्ष में 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है।

सरकार ने जैविक उत्पादन एवं निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम का नया संस्करण लागू किया गया है जिसमें किसानों के अनुकूल नियम, सरल प्रमाणन व्यवस्था, अधिक पारदर्शिता एवं बेहतर निगरानी प्रणाली शामिल है। इसका उद्देश्य भारत के जैविक निर्यात को मजबूत करना है जिसमें वर्ष 2030 तक करीब दो अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है।

भाषा निहारिका

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