नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) दैनिक उपभोग की वस्तुएं बनाने वाली कंपनी नेस्ले इंडिया ने शुक्रवार को कहा कि उसके शिशु पोषण उत्पाद सभी लागू नियमों के ‘‘पूरी तरह अनुरूप’’ हैं और नैन एक्सेला प्रो तथा लैक्टोजेन प्रो के लेबल को खाद्य सुरक्षा नियामक भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की विशेषज्ञ समिति ने मंजूरी दी थी।
नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता ने खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा तीन शिशु पोषण उत्पादों को लेकर कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की घोषणा के कुछ घंटे बाद जारी बयान में कहा, ‘‘उक्त उत्पादों (नैन एक्सेला प्रो और लैक्टोजेन प्रो) और उनके लेबल को एफएसएसएआई की विशेषज्ञ समिति ने मंजूरी दी थी।’’
इससे पहले दिन में एफएसएसएआई ने सोशल मीडिया मंच ‘इंस्टाग्राम’ पर जानकारी दी कि उसने इन उत्पादों में खाद्य सुरक्षा मानकों का कथित रूप से पालन नहीं करने को लेकर नेस्ले इंडिया के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है।
एफएसएसएआई ने कहा था कि उसने ई-कॉमर्स मंचों पर उपलब्ध नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1, लैक्टोजेन प्रो 1 और एक फॉलो-अप फॉर्मूला तथा इनसे जुड़ी प्रचार सामग्री की जांच की।
कंपनी ने कहा कि उसने लेबल पर दिए गए विवादित दावों को लेकर अधिकारियों को अपना विस्तृत जवाब फिर से सौंपा है।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘नोटिस के जवाब में हमने लेबल पर दिए गए दावों को लेकर अधिकारियों को अपना विस्तृत जवाब फिर से सौंपा है। ये दावे तथ्यात्मक हैं और वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित हैं।’’
नेस्ले इंडिया ने नियमों का पालन करने की बात दोहराते हुए कहा कि वह नियामक के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगी।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम पुष्टि करते हैं कि हम सभी नियमों का पालन करते हैं, जिसमें लागू कानूनों के तहत सभी मानक और लेबल पर दी जाने वाली घोषणाएं शामिल हैं। हम उपभोक्ता जागरूकता की दिशा में एफएसएसएआई के प्रयासों में उसके साथ मिलकर काम करते और सहयोग करते रहेंगे।’’
नियामक ने नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 में ‘5एचएमओ’ और ‘व्हे प्रोटीन’ से जुड़े दावों पर आपत्ति जताई थी। वहीं, लैक्टोजेन प्रो 1 में ‘व्हे प्रोटीन’ को आसानी से पचने वाला बताने वाले दावे पर सवाल उठाया था।
एफएसएसएआई ने कहा कि उसने इन दावों को लेकर नेस्ले इंडिया से स्पष्टीकरण मांगा था। दोनों उत्पाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम, 2020 के विनियम 4(2) का उल्लंघन करते पाए गए। यह प्रावधान शिशु खाद्य पदार्थों की बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से किए जाने वाले प्रचार संबंधी दावों या सामग्री पर रोक लगाता है। इसके अलावा, ये उत्पाद शिशु दूध विकल्प, ‘फीडिंग’ बोतल और शिशु खाद्य (उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का विनियमन) अधिनियम, 1992 की धारा 3 के भी खिलाफ पाए गए, जो ऐसे उत्पादों के विज्ञापन या प्रचार पर रोक लगाती है।
वहीं नेस्ले इंडिया द्वारा निर्मित एक फॉलो-अप फॉर्मूला का नमूना प्रयोगशाला जांच में बायोटिन की मात्रा के मामले में मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। नमूने को दोबारा जांच के लिए भेजा गया और संदर्भ प्रयोगशाला ने भी इसे 2020 के नियमों में निर्धारित बायोटिन की आवश्यकता के अनुरूप नहीं पाया।
एफएसएसएआई ने कहा कि इन निष्कर्षों के मद्देनजर उसने तीनों उत्पादों के संबंध में नेस्ले इंडिया के खिलाफ तीन अलग-अलग निर्णयन मामले दर्ज किए हैं।
एफएसएसएआई द्वारा कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद शुक्रवार को बीएसई पर नेस्ले इंडिया के शेयर में गिरावट दर्ज की गई।
यह एफएसएसएआई और नेस्ले इंडिया के बीच दूसरा बड़ा नियामकीय विवाद है।
इससे पहले 2015 में खाद्य सुरक्षा नियामक ने सीसे की कथित अधिक मात्रा और लेबल संबंधी चिंताओं को लेकर नेस्ले इंडिया के मैगी इंस्टेंट नूडल्स को देशभर से वापस मंगाने का आदेश दिया था। बाद में यह प्रतिबंध हटा दिया गया और अधिकृत प्रयोगशालाओं की जांच में उत्पाद को मंजूरी मिलने के बाद मैगी भारतीय बाजार में वापस आ गई।
भाषा निहारिका पाण्डेय
पाण्डेय