एफटीए, आयात शुल्क में कमी से बढ़ेगा एफडीआई प्रवाह : एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री

एफटीए, आयात शुल्क में कमी से बढ़ेगा एफडीआई प्रवाह : एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री

एफटीए, आयात शुल्क में कमी से बढ़ेगा एफडीआई प्रवाह : एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री
Modified Date: May 17, 2026 / 12:50 pm IST
Published Date: May 17, 2026 12:50 pm IST

(कुमार दीपांकर)

नयी दिल्ली, 17 मई (भाषा) एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के मुख्य अर्थशास्त्री अल्बर्ट पार्क ने कहा है कि मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए), आयात शुल्क में कमी और कारोबारी माहौल में सुधार से भारत में विदेशी पूंजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। हाल के वर्षों में देश में शुद्ध विदेशी पूंजी प्रवाह में नरमी देखी गई है।

उन्होंने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा कि भारत को विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए आयात शुल्क में लगातार कमी करनी चाहिए ताकि यहां निवेश करने वाली कंपनियां वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनी रहें।

आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2021-22 के दौरान शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 38.6 अरब डॉलर रहा था, जो 2022-23 में घटकर 28 अरब डॉलर और 2023-24 में और घटकर 10.2 अरब डॉलर रह गया। शुद्ध एफडीआई यानी कुल निवेश प्रवाह में से निकासी घटाने के बाद का आंकड़ा 2024-25 में घटकर केवल एक अरब डॉलर रह गया। हालांकि, 2025-26 की अप्रैल-दिसंबर अवधि में यह सुधरकर तीन अरब डॉलर पर पहुंच गया।

पार्क ने कहा कि भारत को मजबूत बुनियादी ढांचे और एकीकृत सुविधाओं वाले औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने चाहिए, ताकि विदेशी कंपनियों को एक ही स्थान पर अपनी कारोबारी जरूरतों का समाधान मिल सके। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते भारत में एफडीआई बढ़ाने में मददगार साबित होंगे।

उन्होंने कहा, “एशियाई विकास बैंक शहरों के बेहतर प्रशासन और एकीकृत योजना पर भी जोर दे रहा है। इसमें कारोबार की जरूरतों के अनुरूप लॉजिस्टिक, नियामकीय ढांचे और मानव संसाधन विकास को शामिल किया जाता है। स्मार्ट शहरीकरण से कारोबारी समुदाय की चिंताओं को दूर किया जा सकता है।”

पार्क ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता हमेशा पूंजी को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर मोड़ देती है और फिलहाल एशियाई बाजारों में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट का असर एशिया पर दुनिया के अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक पड़ रहा है।

उन्होंने भारत में श्रम सुधार और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) जैसे सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार को सुधारों की गति बनाए रखनी चाहिए।

कच्चे तेल की कीमतों पर उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट लंबे समय तक बने रहने से तेल कीमतें अपेक्षाकृत ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।

उन्होंने कहा, “हमारे नए अनुमान के अनुसार 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है, जबकि 2027 में यह करीब 80 डॉलर प्रति बैरल पर बनी रह सकती है। यानी तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।”

पार्क ने कहा कि वायदा बाजार भी अगले वर्ष तक ऊंची कीमतों के संकेत दे रहा है। हालांकि, मौजूदा समय में आपूर्ति की कमी के कारण हाजिर बाजार और निकट अवधि के वायदा बाजार में अतिरिक्त मूल्य प्रीमियम भी देखने को मिल रहा है।

भारत पर पश्चिम एशिया संकट के असर के बारे में उन्होंने कहा कि इससे चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर पर 0.6 प्रतिशत का असर पड़ सकता है और वृद्धि दर घटकर 6.3 प्रतिशत रह सकती है। यह अगले वित्त वर्ष में बढ़कर 7.3 प्रतिशत पर पहुंच सकती है।

एडीबी ने चालू वित्त वर्ष में भारत में महंगाई दर 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

भाषा अजय अजय

अजय


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