ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को सीमित राहत, महंगाई पर बढ़ेगा दबाव: विशेषज्ञ
ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को सीमित राहत, महंगाई पर बढ़ेगा दबाव: विशेषज्ञ
नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पेट्रोल और डीजल के दामों में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को सीमित राहत मिलेगी और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से हो रहे भारी नुकसान की भरपाई नहीं हो पाएगी। हालांकि इससे महंगाई पर मामूली दबाव बढ़ सकता है। विश्लेषकों ने शुक्रवार को यह राय जताई।
उनका कहना है कि ईरान संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आपूर्ति बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। इससे तेल विपणन कंपनियों की लागत बढ़ी है और सरकारी वित्त पर दबाव बढ़ा है।
डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री एवं कार्यकारी निदेशक राधिका राव ने कहा कि यह कदम अपेक्षित था क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और तेल कंपनियों तथा राजकोषीय स्थिति पर बढ़ते दबाव को देखते हुए यह जरूरी हो गया था।
उन्होंने कहा, “वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और इसके कारण घरेलू तेल विपणन कंपनियों तथा सरकारी वित्त पर बढ़ते बोझ को देखते हुए यह कदम लंबे समय से अपेक्षित था।”
राव ने कहा कि ईंधन के दाम बढ़ने से मांग में कुछ कमी आ सकती है और आयात बिल भी घट सकता है।
उन्होंने अनुमान लगाया कि इससे मुद्रास्फीति में 0.15 प्रतिशत से 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है।
इक्रा के प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि यदि कच्चा तेल महंगा बना रहता है, तो यह बढ़ोतरी तेल विपणन कंपनियों की लाभप्रदता बहाल करने के लिए पर्याप्त नहीं है
उन्होंने कहा, ‘‘105-110 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर, इस बढ़ोतरी के बाद भी तेल कंपनियों को ईंधन और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।’
क्रिसिल के सेहुल भट्ट ने इस बढ़ोतरी को आंशिक लेकिन महत्वपूर्ण कदम बताया।
भट्ट ने कहा कि अपने चरम स्तर पर तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर 23 से 30 रुपये तक का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था, जिससे कुल मिलाकर प्रतिदिन लगभग 1,300 से 1,400 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा था।
भाषा योगेश रमण
रमण

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