दावोस, 15 जनवरी (भाषा) भविष्य की संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए सर्वश्रेष्ठ देशों के वैश्विक सूचकांक में भारत को 35वां स्थान दिया गया है, जबकि इस सूची में ब्रिटेन शीर्ष पर है।
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक से इतर न्यूजवीक वैंटेज और होराइजन समूह ने सोमवार को फ्यूचर पॉसिबिलिटीज इंडेक्स (एफपीआई) जारी किया। शीर्ष पांच में ब्रिटेन के बाद डेनमार्क, अमेरिका, नीदरलैंड और जर्मनी हैं।
बड़े उभरते बाजारों में चीन इस साल 19वें स्थान पर है। वहीं ब्राजील 30वें, भारत 35वें और दक्षिण अफ्रीका 50वें स्थान पर रहा।
अध्ययन में उन कारकों की तुलना की गई जो सरकारों, निवेशकों तथा अन्य निजी क्षेत्र के हितधारकों को 70 देशों में वृद्धि और कल्याण के लिए छह वैश्विक परिवर्तनकारी रुझानों का लाभ उठाने में मदद करेंगे।
एक्साबाइट इकोनॉमी (उन्नत डिजिटल प्रौद्योगिकियां), वेलबीइंग इकोनॉमी (स्वास्थ्य रोकथाम व कल्याण), नेट जीरो इकोनॉमी (कार्बन उत्सर्जन में कमी), सर्कुलर इकोनॉमी (पुनर्चक्रण व पुन: उपयोग), बायोग्रोथ इकोनॉमी (खाद्य व कृषि नवाचार) और एक्सपीरियंस इकोनॉमी (भौतिक वस्तुओं के बजाय अनुभवों की खपत) ये छह वैश्विक परिवर्तनकारी रुझान हैं।
अध्ययन में कहा गया कि सभी छह रुझानों में 2030 तक संयुक्त रूप से 44000 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की व्यापार संभावनाओं का अनुमान है, जो 2023 में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 40 प्रतिशत से अधिक है।
अध्ययन में मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय संगठनों के आंकड़ों के साथ-साथ फ्रोनेसिस पार्टनर्स द्वारा परियोजना के लिए किए गए 5,000 व्यावसायिक अधिकारियों के सर्वेक्षण का इस्तेमाल किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, इन अवसरों से आर्थिक वृद्धि और व्यापक सामाजिक भलाई के मामले में ‘ग्लोबल साउथ’ की तुलना में ‘ग्लोबल नोर्थ’ को अधिक लाभ होने की संभावना है, जिसके लिए एक मजबूत उद्योग आधार की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय विकास समुदाय को संबंधित उद्योगों को मजबूत करके विकासशील देशों को इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने में मदद करनी चाहिए।
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