रत्न एवं आभूषण निर्यात दिसंबर में 4.98 प्रतिशत घटकर 188.38 करोड़ डॉलर: जीजेईपीसी

रत्न एवं आभूषण निर्यात दिसंबर में 4.98 प्रतिशत घटकर 188.38 करोड़ डॉलर: जीजेईपीसी

रत्न एवं आभूषण निर्यात दिसंबर में 4.98 प्रतिशत घटकर 188.38 करोड़ डॉलर: जीजेईपीसी
Modified Date: January 16, 2026 / 08:51 pm IST
Published Date: January 16, 2026 8:51 pm IST

मुंबई, 16 जनवरी (भाषा) भारत का कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात दिसंबर 2025 में सालाना आधार पर 4.98 प्रतिशत घटकर 188.38 करोड़ डॉलर (16,978.44 करोड़ रुपये) रहा। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने मुख्य निर्यात बाजारों की मांग पर असर डाला। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

जीजेईपीसी ने कहा कि दिसंबर 2024 में कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात 198.26 करोड़ डॉलर (16,843.87 करोड़ रुपये) का रहा था।

चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-दिसंबर के दौरान निर्यात सालाना आधार पर 2,075.13 करोड़ डॉलर पर लगभग स्थिर रहा। पिछले साल इसी अवधि में यह 2,083.74 करोड़ डॉलर था।

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जीजेईपीसी ने कहा कि लगभग एक जैसा प्रदर्शन, बाजार में स्थिरता दिखाता है। आभूषण निर्यात खासकर सोने, चांदी और प्लैटिनम आभूषण में अच्छी वृद्धि हुई है, जिससे तराशे और पॉलिश किए हुए हीरे और प्रयोगशाला में निर्मित हीरे में आई नरमी की भरपाई हुई है।

जीजेईपीसी के अध्यक्ष, किरीट भंसाली ने कहा, ‘‘यह रुख उत्पाद मिश्रण के अनुकूलतम बनाने, मूल्यवर्धन और अलग-अलग निर्यात गंतव्यों के जरिए उद्योग की ढलने की क्षमता को दिखाता है।’’

एक मुख्य स्थिरता लाने वाला पहलू उद्योग की मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का फायदा उठाने और दूसरे बाजार में अपनी मौजूदगी को बढ़ाने की क्षमता रही है। संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात सालाना 28.08 प्रतिशत बढ़कर 6.89 अरब डॉलर हो गया, जबकि हांगकांग को निर्यात 28.19 प्रतिशत बढ़कर 4.25 अरब डॉलर हो गया।

ऑस्ट्रेलिया को निर्यात में भी अच्छी प्रगति हुई, जो 39.83 प्रतिशत बढ़कर 27.78 करोड़ डॉलर हो गया। यह विविधीकृत और एफटीए समर्थित बाजार की बढ़ती अहमियत को बताता है।

हालांकि, जीजेईपीसी आंकड़ों से पता चला कि अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान संयुक्त राष्ट्र अमेरिका को निर्यात में सालाना आधार पर 44.42 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 3.86 अरब डॉलर रहा। पिछले साल इसी अवधि में यह 6.95 अरब डॉलर था।

दिसंबर 2025 में, अमेरिका को निर्यात में सालाना 50.44 प्रतिशत की गिरावट आई, जो शुल्क से जुड़े दबाव और कमजोर मांग के लगातार असर को दिखाता है।

भंसाली ने कहा, ‘‘अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना हुआ है, जो हमारे रत्न एवं आभूषण निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा है। निर्यात में तेज गिरावट गंभीर चिंता की बात है।’’

भंसाली ने कहा, ‘‘शुल्क को लेकर लंबे समय तक बनी अनिश्चितता भारतीय आभूषण निर्यात के लिए अमेरिकी बाजार की लंबे समय की लाभप्रद स्थिति पर बुरा असर डाल सकती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमें सरकार पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि व्यापार वार्ता का सकारात्मक और समय पर हल निकलेगा।’’

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण


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