पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहने से सोने में बना रह सकता है उतार-चढ़ाव: विश्लेषक
पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहने से सोने में बना रह सकता है उतार-चढ़ाव: विश्लेषक
नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच सोने की कीमतों में अगले सप्ताह भी उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। निवेशकों की पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रमों और घरेलू बाजार की धारणा को प्रभावित करने वाले प्रमुख वृहत आर्थिक आंकड़ों पर नजर होगी। विश्लेषकों ने यह कहा।
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लि. के उपाध्यक्ष प्रणव मेर ने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रमों पर नजर बनी रहेगी। तनाव बढ़ने से सोने की कीमतों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, लेकिन तनाव कम होने के संकेत मिलने पर भारी बिकवाली हो सकती है।’’
मेर ने कहा, ‘‘चांदी में अभी सीमित दायरे में घट-बढ़ हो रही है। लेकिन इसमें भारी अस्थिरता देखी जा रही है। इसका कारण सोने और तांबा तथा जस्ता जैसी औद्योगिक धातुओं में सीमित दायरे में घट-बढ़ के कारण इसके लाभ सीमित हैं।’’
पिछले सप्ताह घरेलू बाजार में सर्राफा वायदा में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में चांदी 14,359 रुपये यानी 5.08 प्रतिशत टूटी, जबकि सोना 470 रुपये यानी 0.3 प्रतिशत फिसला।
एंजल वन के गैर-कृषि जिंस और मुद्रा विभाग के शोध मामलों के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट प्रथमेश एम ने कहा, ‘‘पिछले सप्ताह सोने की कीमत 1.59 लाख से 1.70 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में रही।
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर तनाव, एशियाई मांग, केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीद, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड का उच्च प्रतिफल और डॉलर की मजबूती सर्राफा बाजार में कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं।
वैश्विक स्तर पर कॉमेक्स में चांदी के वायदा भाव में 8.98 डॉलर यानी लगभग 10 प्रतिशत की कमी आई, जबकि सोने की कीमतों में 89.2 डॉलर यानी 1.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
मेर ने कहा कि अमेरिकी डॉलर, फ्रैंक और बॉन्ड जैसे वैकल्पिक सुरक्षित निवेश विकल्पों की बढ़ती मांग के बीच सोना साप्ताहिक आधार पर नकारात्मक रूख के साथ बंद हुआ है। हालांकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण गिरावट सीमित बनी हुई है।
विश्लेषकों ने कहा कि बढ़ते संघर्ष के बीच खासकर पश्चिम एशिया क्षेत्र के कारोबारियों की मुनाफावसूली या नकदी बढ़ाने के उद्देश्य से प्रमुख वैश्विक ईटीएफ से निकासी बढ़ रही है। साथ ही, ऊर्जा की बढ़ती कीमत ने जून में होने वाली बैठक में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कम कर दिया है।
उन्होंने कहा कि निवेशक चीन के मुद्रास्फीति और व्यापार आंकड़ों के साथ-साथ अमेरिका, जर्मनी और भारत के मुद्रास्फीति आंकड़ों पर नजर रखेंगे। सप्ताह के अंत में जारी होने वाले अस्थायी जीडीपी, व्यक्तिगत उपभोग व्यय, मूल्य सूचकांक और अमेरिकी उपभोक्ता धारणा वैश्विक वृद्धि और मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण को निर्देशित करेंगे।
भाषा रमण सुमित
रमण

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