डब्ल्यूजीसी ने कहा, आयात घटाने के लिए सोने को रणनीतिक खनिज का दर्जा मिले

डब्ल्यूजीसी ने कहा, आयात घटाने के लिए सोने को रणनीतिक खनिज का दर्जा मिले

डब्ल्यूजीसी ने कहा, आयात घटाने के लिए सोने को रणनीतिक खनिज का दर्जा मिले
Modified Date: August 4, 2026 / 05:24 pm IST
Published Date: August 4, 2026 5:24 pm IST

मुंबई, चार अगस्त (भाषा) विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) ने सरकार से सोने को रणनीतिक खनिज (स्ट्रैटेजिक मिनरल) के तौर पर वर्गीकृत करने का आग्रह किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि इससे घरेलू खनन को बढ़ावा मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के भारत के क्षेत्रीय मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सचिन जैन के अनुसार, सोने को ‘रणनीतिक खनिज’ का दर्जा मिलने से ‘एकल खिड़की मंजूरी’ प्रणाली लागू हो सकेगी। इससे खनन कंपनियों को राज्य सरकारों से जुड़ी कई मंजूरियों के बजाय केंद्र से सीधे मंजूरी मिल सकेगी।

जैन ने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘हम लगातार बातचीत कर रहे हैं और खनन मंत्रालय के साथ हुई चर्चाओं में हमने इस मुद्दे को खास तौर पर उठाया है।’’

जैन ने कहा कि अगर सोने को ‘रणनीतिक खनिज’ की सूची में शामिल किया जाता है, तो कई चीजें बदल जाएंगी और आसान हो जाएंगी। उन्होंने कहा, ‘‘निवेशक और खनन करने वाली कंपनियां ‘एकल खिड़की मंजूरी’ के तहत केंद्रीय मंत्रालय से लाइसेंस ले सकती हैं और देश के किसी भी हिस्से में खनन कर सकती हैं।’’

जैन ने कहा, ‘‘इसका सीधा संबंध, ‘चालू खाते के घाटे’ और आत्मनिर्भर बनने के हमारे लक्ष्य से है। खनन को तेज करने और सोने को ‘रणनीतिक खनिज’ की सूची में शामिल करने से इसमें काफी मदद मिलेगी।’’

गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से अपील की थी कि वे एक साल तक सोना न खरीदें।

‘स्वर्णिम उड़ान 2047’ शीर्षक की रिपोर्ट में डब्ल्यूजीसी ने कहा है कि वर्ष 2047 तक भारत की सोने की सालाना मांग का 10-15 प्रतिशत हिस्सा घरेलू खनन से पूरा किया जाना चाहिए।

सोने की वैश्विक मांग पर जैन ने कहा कि लगातार बनी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, बढ़ते वैश्विक कर्ज और अमेरिकी डॉलर पर भरोसे को लेकर चिंताओं के बीच केन्द्रीय बैंकों द्वारा लंबे समय के रणनीतिक संपत्ति के तौर पर सोना खरीदना जारी रखने की उम्मीद है।

उन्होंने आयात पर निर्भरता कम करने के लिए भारत में घरों में रखे सोने का मौद्रीकरण करने (आर्थिक गतिविधियों में लाने) की जरूरत पर भी जोर दिया।

डब्ल्यूजीसी के अनुमान के मुताबिक, भारतीय घरों में लगभग 31,000 टन सोना है, जिसमें करीब 20,000 टन गहनों के रूप में और लगभग 6,000 टन छड़ (बार) और सिक्कों के रूप में है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस सोने की कीमत लगभग 314.9 लाख करोड़ रुपये है।

रिपोर्ट कहती है कि अगर इस बेकार पड़े सोने के सिर्फ एक प्रतिशत हिस्से को भी हर साल मौद्रीकृत किया जाए, तो इससे 3.1 लाख करोड़ रुपये के सोने के आयात की जगह ली जा सकती है, आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।

जैन ने कहा कि सोने के मौद्रीकरण ढांचे को आसान और डिजिटल बनाने से, खासकर बार और सिक्कों के मामले में, बेकार पड़े सोने के एक बड़े हिस्से को उत्पादक आर्थिक कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्रिप्टोकरेंसी के बारे में जैन ने कहा कि डिजिटल संपत्ति तो बनी रहेगी, लेकिन उनका मकसद सोने से अलग होगा।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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